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बिहार चुनाव 2025: एनडीए vs महागठबंधन, जन सुराज की नई चुनौती

By Ayush

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पटना, 23 सितंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, और राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह से गरमा गया है। 243 विधानसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर के साथ-साथ नई पार्टियों और नेताओं की एंट्री ने इस बार के चुनाव को और भी रोचक बना दिया है। आइए, जानते हैं बिहार की सियासत में क्या-क्या हो रहा है।

चुनाव की तारीखों का इंतज़ार

निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान 2 से 12 अक्टूबर 2025 के बीच हो सकता है। 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद आयोग की टीम बिहार का दौरा करेगी, जिसके बाद अधिसूचना जारी होने की संभावना है। इस बार चुनाव दो से तीन चरणों में नवंबर 2025 में संपन्न हो सकते हैं, ताकि दुर्गा पूजा, दीपावली, और छठ जैसे त्योहारों के बीच मतदान प्रक्रिया बाधित न हो।

एनडीए की रणनीति: बीजेपी-जेडीयू में सीट बंटवारा

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। बीजेपी ने 24 और 25 सितंबर को पटना में दो दिवसीय बैठक बुलाई है, जिसमें सीट बंटवारे से लेकर उम्मीदवारों के चयन तक के फैसले लिए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं बिहार की चुनावी कमान संभाल रहे हैं, और सभी प्रमुख निर्णय पटना में ही होंगे। बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट बंटवारे का खाका लगभग तैयार है, लेकिन छोटे सहयोगी दलों जैसे हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और सुभासपा की मांगों ने चर्चा को और गर्म कर दिया है। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बिहार में 29 सीटों पर दावेदारी ठोकी है। उनका दावा है कि राजभर समाज कई क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाता है, और उनकी पार्टी एनडीए के साथ मिलकर मैदान में उतरेगी।

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महागठबंधन में तनाव: सीट बंटवारे पर विवाद

महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने दावा किया है कि अगले 10 दिनों में सीट बंटवारा तय हो जाएगा। उनकी पार्टी मुजफ्फरपुर जैसे क्षेत्रों में निषाद समाज के समर्थन के साथ अधिकतम सीटों पर लड़ने की इच्छा रखती है। वहीं, भाकपा (माले) लिबरेशन ने कांग्रेस को चेतावनी दी है कि वह 2020 के चुनावों से सबक ले और “अपनी औकात से ज्यादा” सीटों की मांग न करे। कांग्रेस ने 70-76 सीटों की मांग की है, जबकि भाकपा (माले) ने 40 सीटों की सूची सौंपी है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी महागठबंधन की धुरी बनी हुई है, लेकिन लालू परिवार में आंतरिक कलह ने भी सियासी हलचल बढ़ा दी है। तेज प्रताप यादव ने साफ कहा है कि वह अब कभी आरजेडी में वापस नहीं लौटेंगे, जबकि रोहिणी आचार्य के बागी तेवर भी चर्चा में हैं।

नई पार्टियों का दबदबा: जन सुराज और गौ भक्त

इस बार का चुनाव इसलिए भी खास है, क्योंकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी नया विकल्प बनकर उभर रही है। कई सीटों पर जन सुराज के उम्मीदवारों ने प्रचार शुरू कर दिया है, जिससे पारंपरिक दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐलान किया है कि सभी 243 सीटों पर उनके समर्थित गौ भक्त प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। यह घोषणा बौसी के मंदार मधुसूदन मंदिर में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान की गई, जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

वोटर लिस्ट और घुसपैठ का विवाद

चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर भी सियासी जंग तेज हो गई है। 1 से 15 सितंबर तक 51,826 लोगों ने नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन किया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर मतदाता सूची में अनियमितताएँ पाई गईं, तो इसे रद्द किया जा सकता है। बीजेपी ने विपक्ष पर घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाया है, जबकि आरजेडी और कांग्रेस इसे बीजेपी का राजनीतिक एजेंडा बता रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से हटाना जरूरी है।

तेजस्वी की अधिकार यात्रा और नीतीश सरकार पर हमला

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव अपनी “बिहार अधिकार यात्रा” के जरिए जनता के बीच जा रहे हैं। उन्होंने नीतीश सरकार पर भ्रष्टाचार और बदहाली का आरोप लगाते हुए कहा, “कुर्सी काँप रही है, सत्ता हाँफ रही है।” तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर “चूहा घोटाला” जैसे मुद्दों को उठाकर एनडीए की मुश्किलें बढ़ाई हैं। उनकी पोस्ट्स वायरल हो रही हैं, और समर्थक इसे प्रभावी रणनीति मान रहे हैं।

कुछ खास सीटों का समीकरण

  • संदेश विधानसभा: भोजपुर जिले की इस सीट को यादवों का गढ़ माना जाता है। पिछले दो चुनावों से आरजेडी यहाँ जीत रही है, लेकिन इस बार बीजेपी ने वापसी की पूरी तैयारी की है। 
  • खजौली विधानसभा: मधुबनी जिले की इस सीट पर यादव और मुस्लिम वोटरों का दबदबा है। एनडीए और महागठबंधन में कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 
  • गुरुआ विधानसभा: गया जिले की इस सीट पर 2020 में आरजेडी के विनय यादव ने बीजेपी को हराया था। इस बार जन सुराज की एंट्री से मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। 
  • दरौंदा विधानसभा: सिवान जिले की इस सीट को “मिनी पॉलिटिकल लेबोरेट्री” कहा जाता है। यहाँ जातीय समीकरण और राष्ट्रीय राजनीति की नजरें टिकी रहती हैं।

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