बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के प्रति वफादारी का वादा एक बार फिर सुर्खियों में है।
2025 के विधानसभा चुनावों से पहले, नीतीश ने बार-बार यह दोहराया है कि वे एनडीए के साथ ही रहेंगे और कहीं नहीं जाएंगे।
यह वादा न केवल गठबंधन की मजबूती का प्रतीक है, बल्कि नीतीश की छवि को “पलटू राम” से बदलने की कोशिश भी माना जा रहा है।
आइए, इस मुद्दे पर विस्तार से नजर डालते हैं—पृष्ठभूमि, हालिया बयान, राजनीतिक संदर्भ और प्रभाव।
पृष्ठभूमि: नीतीश का राजनीतिक सफर और गठबंधन परिवर्तन
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के एक प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने 20 वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री का पद संभाला है। उनका राजनीतिक इतिहास गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमता है:
- 2005-2014: एनडीए के साथ मजबूत गठबंधन, जिसमें भाजपा मुख्य सहयोगी थी।
- 2014: लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए छोड़कर कांग्रेस-आरजेडी के साथ महागठबंधन बनाया।
- 2017: फिर एनडीए में वापसी।
- 2022: आरजेडी के साथ महागठबंधन में शामिल हुए, लेकिन भाजपा पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया।
- जनवरी 2024: लोकसभा चुनाव से पहले फिर एनडीए में लौटे।
इन उतार-चढ़ावों ने नीतीश को “पलटू राम” की उपाधि दी।
2024 लोकसभा चुनावों के बाद एनडीए की केंद्र सरकार बनाने में नीतीश की भूमिका अहम रही, जहाँ उन्होंने पीएम मोदी को एनडीए का नेता चुने जाने का समर्थन किया।
अब 2025 बिहार चुनावों में यह वादा उनकी साख बचाने का हथियार बन गया है।
हालिया बयान: “मैं कहीं नहीं जाऊंगा”
नीतीश ने हाल के महीनों में कई मौकों पर एनडीए के प्रति वफादारी जताई:
- 15 सितंबर 2025, पूर्णिया रैली: पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर नीतीश ने कहा, “मैं अब कहीं नहीं जाऊंगा।”
उन्होंने अपने पिछले गठबंधन परिवर्तनों को “गलती” बताया और कहा कि आरजेडी-कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन भूल थी। इस दौरान पीएम मोदी मुस्कुराए और तालियां बजीं। - 26 सितंबर 2025: चिराग पासवान (एलजेपी-रा) ने दिल्ली में कहा कि “नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए बिहार में फिर सरकार बनाएगा।”
- 13 जनवरी 2025: शांभवी चौधरी (एलजेपी-रा सांसद) ने साफ़ कहा कि “एनडीए बिहार चुनाव नीतीश के नेतृत्व में ही लड़ेगा।”
- 20 दिसंबर 2024: पटना बैठक में जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने नीतीश के नेतृत्व में “मिशन-2025 और लक्ष्य-225” पूरा करने की बात कही।
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राजनीतिक संदर्भ: क्यों बार-बार वादा?
नीतीश का यह वादा कई कारणों से अहम है:
- छवि सुधार: विपक्ष लगातार उन्हें “अस्थिर” करार देता है। नीतीश जवाब में एनडीए की उपलब्धियां गिनाते हैं—
- 10 लाख नौकरियां
- 1 करोड़ युवाओं को रोजगार
- पेंशन वृद्धि (₹400 से ₹1100)
- गठबंधन मजबूती: चिराग पासवान और भाजपा के बीच पुरानी खटास थी। नीतीश का भरोसा भाजपा को आश्वस्त करता है, जिसके बदले उन्हें सीएम चेहरा घोषित किया गया।
- चुनावी रणनीति: सर्वेक्षणों में नीतीश पिछड़ रहे थे, लेकिन हालिया घोषणाओं (125 यूनिट फ्री बिजली, डोमिसाइल नीति) से एनडीए का ग्रामीण वोट शेयर 40% से बढ़कर 45-50% तक जाने की उम्मीद है।
- केंद्र का समर्थन: पीएम मोदी ने बिहार के लिए सड़क, रेल और रोजगार योजनाओं की घोषणाएँ कीं, जो नीतीश के वादे को मजबूत करती हैं।
प्रमुख बयान: एक नजर में
| तारीख | स्थान/संदर्भ | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| 15 सितंबर 2025 | पूर्णिया रैली (पीएम मोदी संग) | “मैं कहीं नहीं जाऊंगा” – पिछली गलती मानी, एनडीए वफादारी |
| 26 सितंबर 2025 | दिल्ली (चिराग पासवान) | “नीतीश के नेतृत्व में सरकार बनेगी” |
| 13 जनवरी 2025 | समस्तीपुर (शांभवी चौधरी) | “एनडीए नीतीश के साथ चुनाव लड़ेगा” |
| 20 दिसंबर 2024 | पटना बैठक | “मिशन-2025 नीतीश के नेतृत्व में” |
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ
- एनडीए को फायदा: गठबंधन में एकजुटता बनी रहती है। सीट बंटवारा भी तय हो गया है, जहाँ नीतीश सीएम रहेंगे।
- विपक्ष की प्रतिक्रिया: आरजेडी और कांग्रेस इसे “चुनावी जुमला” बता रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश के वादे सिर्फ़ पुराने दोहराव हैं।
- जनता की नजर: सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली हैं। युवा TRE-4 भर्ती (1.20 लाख पद) पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि ग्रामीण पेंशन वृद्धि से खुश हैं।
- भविष्य की संभावना:
- अगर एनडीए जीतता है, तो नीतीश का चौथा कार्यकाल पक्का होगा।
- हार की स्थिति में गठबंधन टूट सकता है।
- चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में संभावित हैं।














