पटना, 12 अक्टूबर 2025 — राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय कर लिया है। कुल 243 सीटों वाले विधानसभा में भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड)—दोनों को बराबर 101-101 सीटें मिली हैं। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को 6, और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को 6 सीटें आवंटित की गई हैं।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस साझा फैसले को सकारात्मक बताया, जबकि जद(यू) के एक विधायक गोपाल मंडल ने टिकट न मिलने पर आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया है। नीचे इस फैसले की पृष्ठभूमि, बंटवारे का ब्रेकडाउन, नेताओं की प्रतिक्रियाएँ और राजनीतिक निहितार्थ दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि और बातचीत की प्रक्रिया
- चुनाव की तारीखें: मतदान दो चरणों में — 6 और 11 नवंबर; नतीजे 14 नवंबर।
- सीट बंटवारे पर कई दौर की बैठकों के बाद दिल्ली और पटना में अंतिम समझौता हुआ। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व (अमित शाह, जेपी नड्डा) और बिहार प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने बातचीत में सक्रिय भूमिका निभाई।
- शुरुआती पोजिशन में जद(यू) ने 115 सीटों की मांग रखी थी; भाजपा ने बराबरी का फॉर्मूला प्रस्तावित किया। चिराग पासवान ने 40–50 सीटों की मांग की थी। अंतिम समीकरण में भाजपा व जद(यू) के बीच बराबरी होती दिखी, जबकि छोटे सहयोगियों के हिस्से कम सीटें गईं।
सीट बंटवारे का संक्षिप्त ब्रेकडाउन
| पार्टी | सीटें (आवंटित) | प्रमुख फोकस क्षेत्र | 2020 में प्रदर्शन (लड़ी/जीती) |
|---|---|---|---|
| भाजपा (BJP) | 101 | शहरी व ग्रामीण, विशेषकर मगध और कोसी | 110 / 74 |
| जद(यू) (JD(U)) | 101 | नीतीश का गढ़ — नालंदा, वैशाली, मिथिला | 115 / 43 |
| एलजेपी (LJP-RV) | 29 | दलित बहुल इलाके — हायसी, जमुई, वैशाली | अलग लड़ी (लोकसभा 5/5) |
| आरएलएम (RLM) | 6 | कुशवाहा प्रभाव क्षेत्र — रोहतास, औरंगाबाद | 2020: 0/0 |
| हम (HAM) | 6 | महादलित क्षेत्रों — गया, जहानाबाद | 2020: 7/4 |
| कुल | 243 | — | — |
किसने क्या कहा — नेताओं के बयान
- धर्मेंद्र प्रधान (भाजपा): “एनडीए के साथियों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में सीटों का वितरण पूर्ण किया। 2025 में हम सरकार बनाएंगे।”
- चिराग पासवान (एलजेपी-RV): “29 सीटें हमारी मेहनत का फल हैं—बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट।”
- नीतीश कुमार / जद(यू): औपचारिक बयान नहीं आया; पर वरिष्ठ नेताओं ने इसे सकारात्मक करार दिया।
- जीतन राम मांझी (हम): “हमने 15 मांगीं, 6 मिलीं, फिर भी एनडीए के साथ हैं।”
- उपेंद्र कुशवाहा (आरएलएम): “हमारी 6 सीटें कुशवाहा समाज को मजबूती देंगी।”
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विवाद: गोपाल मंडल का धरना
- जद(यू) विधायक गोपाल मंडल (भागलपुर सदर) को टिकट न मिलने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू किया।
- पार्टी ने मामले को “आंतरिक” बताया और मनाने की कोशिश की जा रही है; यह तनाव एनडीए की सार्वजनिक एकजुटता पर सवाल उठा सकता है।
राजनीतिक निहितार्थ
- भाजपा-जद(यू) बराबरी: दोनों प्रमुख घटकों को बराबर सीटें देने का अर्थ है—भाजपा का प्रभाव बढ़ना और नीतीश-जद(यू) की भूमिका पर सवाल।
- चिराग का उदय: 29 सीटों से एलजेपी को विधानसभा में मजबूत भूमिका मिलने की उम्मीद। लोकसभा सफलता के बाद यह बढ़त महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- छोटे दलों की असंतुष्टि: मांझी और कुशवाहा को अपेक्षित से कम सीटें मिलने से रंजिश की आशंका बरकरार है; पर फिलहाल वे गठबंधन में बने रहने का संदेश दे रहे हैं।
- महागठबंधन पर असर: विपक्षी दलों के बीच सीट-बाँटने में देरी और असंतोष एनडीए को रणनीतिक बढ़त दे सकता है।
चुनावी पूर्वानुमान और सर्वे
- मैट्रिज-आईएएनएस सर्वे: एनडीए को 150–160 सीटें मिलने का अनुमान। विश्लेषक भाजपा को 80–85 और जद(यू) को 60–65 सीटें दे रहे हैं।
- अन्य सर्वे: कुछ रिपोर्ट्स ने एनडीए के लिए 49% वोट शेयर का अनुमान भी दिया है।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि सीट बंटवारा एनडीए को गठबंधन-एकता का संदेश देता है, पर आंतरिक असंतोष परिणाम पर असर डाल सकता है।
निष्कर्ष
एनडीए का यह अंतिम फॉर्मूला गठबंधन की सत्तारूढ़ ताकत को बनाए रखने का प्रयत्न है। समानांतर रूप से छोटे सहयोगियों में असंतोष और स्थानीय नेताओं की नाराजगी चुनावी समरूपता को चुनौती दे सकती है। बिहारवासी अब विकास, सुशासन और जातीय समीकरणों को देखते हुए मतदान का फैसला करेंगे। अधिक अपडेट के लिए स्थानीय मीडिया और आधिकारिक सूचनाओं को फॉलो करें।














