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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: जद(यू) को बड़ा झटका — भागलपुर सांसद अजय मंडल ने दिया इस्तीफा, लगाए गंभीर आरोप

By Ayush

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पटना, 13 अक्टूबर 2025 — बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनता दल (यूनाइटेड) को एक और बड़ा झटका लगा है। जद(यू) के कद्दावर नेता और भागलपुर लोकसभा सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर सांसद पद से इस्तीफे की अनुमति मांगी है।

अपने पत्र में उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर टिकट वितरण में अनदेखी, नीतीश से मिलने में बाधा, और संगठन के गलत फैसलों जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। यह कदम एनडीए में सीट बंटवारे के बाद जद(यू) के अंदर बढ़ती नाराजगी को उजागर करता है — खासकर तब जब विधायक गोपाल मंडल पहले से ही धरने पर हैं।


🔹 पृष्ठभूमि और घटना का विवरण

कब और कैसे:
13 अक्टूबर की शाम अजय मंडल ने नीतीश कुमार को एक विस्तृत पत्र लिखा और उसे एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ महीनों में पार्टी ऐसे निर्णय ले रही है, जो संगठन के भविष्य के लिए हानिकारक हैं।

चुनावी संदर्भ:
बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे, जबकि नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। एनडीए में जद(यू) को 101 सीटें मिली हैं। परंतु भागलपुर जिले की कई सीटों (भागलपुर, बिहपुर, सुलेमानपुर) पर टिकट वितरण में स्थानीय नेताओं की अनदेखी से असंतोष भड़क गया।

अजय मंडल, जो भागलपुर के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक माने जाते हैं, ने इसे व्यक्तिगत अपमान बताया।

पार्टी में भूमिका:
अजय मंडल पिछले दो दशकों से जद(यू) के सक्रिय नेता हैं। 2004 से सांसद, 2014 और 2019 में लगातार जीते, और पहले विधायक भी रह चुके हैं। हालांकि, हाल के महीनों में उनकी गोपाल मंडल से पुरानी रंजिश खुलकर सामने आई थी। गोपाल ने उन्हें “पॉकेटमारों का सरदार” तक कहा था।


🔹 अजय मंडल के प्रमुख आरोप (पत्र से अंश)

  1. टिकट वितरण में अनदेखी: “भागलपुर क्षेत्र के सांसद होने के बावजूद विधानसभा टिकट देने में मेरी कोई सलाह नहीं ली गई। ऐसे में मेरा सांसद पद पर बने रहना व्यर्थ है।”
  2. नीतीश से दूरी: “मुझे मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया जा रहा, न ही मेरी राय को कोई महत्व दिया जा रहा है।”
  3. पार्टी के गलत फैसले: “विगत कुछ माह से संगठन में ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जो पार्टी के भविष्य के लिए हानिकारक हैं।”
  4. व्यक्तिगत पीड़ा: “आपके आशीर्वाद से मैं 20-25 वर्षों से जनता की सेवा कर रहा हूं। मेरा उद्देश्य नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी के हित में कदम उठाना है।”

अजय मंडल ने इस्तीफा तत्काल प्रभाव से देने की पेशकश की है, लेकिन औपचारिक स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं।

Also Read बिहार विधानसभा चुनाव 2025: एनडीए में सीट बंटवारा फाइनल — विस्तृत अपडेट


🔹 जद(यू) में अन्य विवाद और असंतोष

1. गोपाल मंडल का धरना:
भागलपुर सदर विधायक गोपाल मंडल ने 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू किया। उन्होंने टिकट न मिलने पर आरोप लगाया कि “पार्टी में साजिश चल रही है।”

2. नवीनगर सीट विवाद:
जद(यू) ने चेतन आनंद को टिकट दिया, जिससे नाराज समर्थक सीएम आवास पहुंचकर नारेबाजी करने लगे।

कुल प्रभाव:
इन घटनाओं से साफ है कि जद(यू) में टिकट बंटवारे को लेकर गंभीर असंतोष है, जो चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।


🔹 नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

  • अजय मंडल:
    “आत्मसम्मान और पार्टी हित में यह कदम उठाया। जनता की सेवा जारी रखूंगा।”
  • नीतीश कुमार (जद(यू)):
    अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा — “यह आंतरिक मामला है, जल्द सुलझ जाएगा।”
  • विपक्ष (राजद):
    तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, “नीतीश की तानाशाही से जद(यू) टूट रही है। बिहारवासी देख लें।”
    कांग्रेस ने भी इसे “सुशासन का अंत” बताया।
  • एनडीए सहयोगी (भाजपा):
    भाजपा ने सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं की, लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी इसे जद(यू) की कमजोरी के रूप में देख रही है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया:
एक्स पर #AjayMandalResign ट्रेंड कर रहा है।
समर्थक कह रहे हैं — “नीतीश ने वफादार को धोखा दिया।”
वहीं आलोचक इसे “चुनावी स्टंट” बता रहे हैं।


🔹 राजनीतिक निहितार्थ

  • जद(यू) पर असर:
    भागलपुर जैसे गढ़ में बगावत से पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है। अजय मंडल के पास ओबीसी-महादलित वोटों का मजबूत आधार है, जिससे 5–7 विधानसभा सीटें प्रभावित हो सकती हैं।
  • एनडीए पर असर:
    भाजपा को कुछ क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है, लेकिन गठबंधन की छवि को नुकसान संभव।
  • महागठबंधन का फायदा:
    विपक्ष अभी सीट बंटवारे में उलझा है, लेकिन जद(यू) के कलह से राजनीतिक हवा बदल सकती है।
  • भागलपुर का महत्व:
    जिले में 6 विधानसभा सीटें हैं — परंपरागत रूप से जद(यू) का गढ़। अजय मंडल की नाराजगी से वोट ट्रांसफर में दिक्कतें होंगी।
  • भविष्य की दिशा:
    अगर इस्तीफा स्वीकार हो गया, तो अजय मंडल निर्दलीय या विपक्ष में शामिल हो सकते हैं। यह कदम नीतीश कुमार की “सुशासन बाबू” छवि पर भी असर डाल सकता है।

🔹 निष्कर्ष

अजय मंडल का इस्तीफा जद(यू) के लिए बड़ा झटका है — खासकर तब, जब बिहार चुनाव से पहले पार्टी को एकजुटता दिखानी थी।
अगर यह कलह नहीं सुलझी, तो एनडीए के भीतर असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे विपक्ष को सीधा लाभ मिलेगा।

#JDUCrisis #BiharElections2025 #AjayMandalResign

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