बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन शुरू हो चुके हैं, लेकिन विपक्षी महागठबंधन (INDIA गठबंधन) में सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही। आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों (सीपीआई, सीपीआई-एमएल आदि) के बीच सीटों पर सहमति नहीं बन पाई है।
17 अक्टूबर को नामांकन की अंतिम तिथि है, लेकिन अब तक कोई फाइनल फॉर्मूला तय नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार, आरजेडी को 130-135 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस 60 सीटों की मांग पर अड़ी है। आरजेडी सिर्फ 50-55 देने को तैयार है। वहीं, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने 25-30 सीटों के साथ डिप्टी सीएम पद की मांग रख दी है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
इस बीच, तेजस्वी यादव ने राघोपुर से नामांकन दाखिल कर गठबंधन को एकजुट दिखाने की कोशिश की, जबकि लालू प्रसाद यादव ने एनडीए पर तीखा प्रहार किया — “एनडीए चुनाव के बाद भाग जाएगा।”
🔹 सीट शेयरिंग विवाद की पृष्ठभूमि
महागठबंधन में सीट बंटवारा 2015 और 2020 के फॉर्मूले पर आधारित होना था, लेकिन इस बार कांग्रेस और छोटे दल अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर अड़े हैं।
- आरजेडी: 243 में से 130-135 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना
- कांग्रेस: 60-70 सीटों की मांग (2020 में 70 सीटें मिली थीं)
- वीआईपी: मिथिला-तिरहुत क्षेत्र में पकड़ का हवाला देते हुए 25-30 सीटें
- वाम दल: 30-35 सीटों की मांग
- जेएमएम: पहली बार 7-10 सीटों पर चर्चा
🔹 आरजेडी का रुख
आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव और तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को 50-55 और वीआईपी को 14-18 सीटें ऑफर की हैं। सूत्र बताते हैं कि आरजेडी ने पहले ही 57 उम्मीदवारों को सिंबल बांट दिया है, जिनमें 4 महिलाएं और 50% नए चेहरे शामिल हैं।
इससे छोटे दल नाराज हैं — उनका कहना है कि यह “आरजेडी की मनमानी” है।
🔹 कांग्रेस की नाराजगी
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार और अखिलेश सिंह ने राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खड़गे से हस्तक्षेप की मांग की है।
कहलगांव (भागलपुर) जैसी पारंपरिक कांग्रेस सीटों पर आरजेडी का दावा भी विवाद की वजह बना है।
🔹 वीआईपी और वाम दलों की असहमति
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने 30 सीटों और डिप्टी सीएम पद की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई, हालांकि बाद में बयान को नरम किया।
वाम दलों ने भी 30 सीटों की मांग की है और चेतावनी दी — “अगर सहमति नहीं बनी, तो फ्रेंडली फाइट होगी।”
🔹 सीट बंटवारे का संभावित फॉर्मूला
| दल | मांगी गई सीटें | प्रस्तावित सीटें | प्रमुख विवादास्पद सीटें |
|---|---|---|---|
| आरजेडी | 140+ | 130-135 | कहलगांव, बछवाड़ा |
| कांग्रेस | 60-70 | 50-61 | भागलपुर, हरलाखू |
| वीआईपी | 25-30 | 14-18 | मिथिला-तिरहुत क्षेत्र |
| वाम दल | 30-35 | 22-30 | AIMIM की पुरानी सीटें |
| जेएमएम | 7-10 | 7-10 | नई एंट्री सीटें |
(स्रोत: विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, 8–15 अक्टूबर 2025)
🔹 कांग्रेस की डेडलाइन और तनाव
दिल्ली में 12–13 अक्टूबर को कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई, जहां राहुल गांधी ने 13 अक्टूबर तक आरजेडी से सहमति बनाने का अल्टीमेटम दिया।
अगर समझौता नहीं हुआ, तो कांग्रेस 60 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह देरी एनडीए को फायदा दे रही है, जिसने पहले ही सीट बंटवारा (71 बीजेपी + 57 जद(यू)) तय कर लिया है।
🔹 तेजस्वी यादव का नामांकन और शक्ति प्रदर्शन
15 अक्टूबर को तेजस्वी यादव ने राघोपुर से नामांकन दाखिल किया। लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, मीसा भारती और मुकेश सहनी उनके साथ मौजूद थे।
हाजीपुर अनुमंडल कार्यालय के बाहर भारी भीड़ उमड़ी। नामांकन के बाद जनसभा में तेजस्वी ने कहा:
“यह चुनाव बिहार के युवाओं का है, हम एनडीए की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।”
नामांकन के बाद तेजस्वी 15+ जनसभाओं का सिलसिला शुरू करेंगे।
🔹 लालू यादव का बयान
लालू प्रसाद ने कहा:
“छह और ग्यारह, एनडीए नौ दो ग्यारह हो जाएगा।”
उन्होंने नीतीश कुमार पर निशाना साधा — “डबल इंजन सरकार का मतलब भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है।”
यह बयान उनके IRCTC घोटाले मामले की सुनवाई से पहले आया, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।
🔹 राजनीतिक प्रभाव
- गठबंधन पर असर: सीट विवाद से एकजुटता कमजोर
- एनडीए को लाभ: सीट बंटवारे की स्पष्टता से बढ़त
- जन सुराज और AIMIM: थर्ड फ्रंट के रूप में मौका
- कांग्रेस की रणनीति: 17 अक्टूबर तक सहमति या अलग राह
निष्कर्ष:
सीट शेयरिंग पर जारी यह घमासान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को और दिलचस्प बना रहा है।
अगर समय रहते सहमति नहीं बनी, तो “फ्रेंडली फाइट” से महागठबंधन को भारी नुकसान हो सकता है — जबकि एनडीए पहले से मैदान में संगठित है।














