पटना, 19 अक्टूबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में टिकट वितरण को लेकर आंतरिक कलह खुलकर सामने आई है।
पूर्वी चंपारण की मधुबन विधानसभा सीट से RJD के पूर्व प्रत्याशी मदन शाह ने 18 अक्टूबर को पटना स्थित लालू प्रसाद यादव के आवास (10 सर्कुलर रोड) के बाहर नाटकीय प्रदर्शन किया।
उन्होंने फूट-फूटकर रोते हुए अपना कुर्ता फाड़ दिया और सड़क पर लेट गए, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे पार्टी के अंदर के विवाद पर नई बहस छिड़ गई है।
मदन शाह ने गंभीर आरोप लगाया कि RJD नेता संजय यादव ने टिकट के बदले 2.7 करोड़ रुपये की मांग की।
उनका दावा है कि लालू प्रसाद यादव ने स्वयं उन्हें टिकट देने का वादा किया था, लेकिन पैसे नहीं देने पर किसी अन्य उम्मीदवार को टिकट दे दिया गया।
घटना का पूरा विवरण: कब और कैसे हुआ
18 अक्टूबर की दोपहर करीब 2 बजे मदन शाह RJD मुख्यालय से निकलकर लालू-राबड़ी आवास पहुंचे।
अंदर प्रवेश की अनुमति न मिलने पर उन्होंने गेट के बाहर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।
वीडियो फुटेज में वे कहते दिखे –
“मैं 20 साल से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। लालू जी ने खुद टिकट का वादा किया था। लेकिन संजय यादव ने 2 करोड़ 70 लाख रुपये मांगे। जब मैंने कहा कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं, तो उन्होंने सबकी सहमति के बावजूद टिकट किसी और को दे दिया।”
प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अपना कुर्ता फाड़ा और जमीन पर लेट गए। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें शांत कराया और वहां से हटाया।
मदन शाह कौन हैं
मदन शाह पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय से RJD के सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
2020 के विधानसभा चुनाव में वे RJD उम्मीदवार थे, लेकिन BJP के राणा रंधीर सिंह से 17,000 से अधिक वोटों से हार गए।
मधुबन सीट यादव-मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और RJD के परंपरागत गढ़ों में गिनी जाती है।
शाह का कहना है कि उन्होंने पार्टी के लिए लगातार काम किया, लेकिन “पैसे वालों के आगे मेहनतकश कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं होती।”
संजय यादव की भूमिका
संजय यादव, RJD के प्रभावशाली नेता और तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकार माने जाते हैं।
वे हरियाणा के महेंद्रगढ़ के मूल निवासी हैं और 2012 से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं।
2024 में उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया था।
मदन शाह का आरोप है कि यादव “टिकट नीलामी” में शामिल हैं और पार्टी के अंदर फैसले उन्हीं के इशारे पर होते हैं।
अब तक संजय यादव या RJD की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर हंगामा
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
X (पूर्व ट्विटर) पर #RJD, #MadanShah और #SanjayYadav हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
कुछ प्रमुख पोस्ट:
- @Patna_Pulse: “RJD नेता मदन शाह राबड़ी आवास के बाहर फूट-फूट कर रो पड़े। संजय यादव ने टिकट के लिए ₹2.7 करोड़ मांगे।”
- @KashishBihar: “मदन शाह फूट-फूटकर रोते हुए सड़क पर लेटे दिखे। बोले—‘2.7 करोड़ मांगे गए टिकट के लिए।’”
- @newGindia: “पूर्व प्रत्याशी मदन शाह का दर्द – बोले ‘RJD में टिकट नहीं, नीलामी हो रही है।’”
इन वीडियो में शाह का भावुक चेहरा और भीड़ का शोर साफ दिखता है।
विपक्षी दलों, खासकर BJP और JDU, ने इस वीडियो को “RJD में भ्रष्टाचार का सबूत” बताते हुए निशाना साधा है।
RJD में बढ़ती टिकट कलह
यह विवाद RJD में टिकट बंटवारे को लेकर जारी असंतोष का हिस्सा है।
पार्टी ने इस चुनाव में महागठबंधन के तहत 142 सीटों पर दावा किया है, लेकिन कई पुराने कार्यकर्ता नाराज हैं।
पिछले उदाहरण:
- बड़हरा सीट पर पूर्व विधायक सरोज यादव ने 3 करोड़ रुपये की “डील” का आरोप लगाकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
- सिवान की रघुनाथपुर सीट पर शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को टिकट देने पर BJP ने “बिहार की सुरक्षा पर खतरा” कहा था।
- भागलपुर सीट पर 2019 के लोकसभा चुनाव के पुराने धन-आरोप फिर सुर्खियों में हैं।
वर्तमान स्थिति:
RJD ने अब तक 51 उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें यादव समुदाय के नेताओं को प्राथमिकता दी गई है।
पूर्व प्रत्याशियों की बगावत से पार्टी का वोटबैंक प्रभावित हो सकता है।
महागठबंधन में JDU को 101 सीटें दी गई हैं, लेकिन RJD के भीतर असंतोष तेजस्वी यादव के लिए चुनौती बन गया है।
राजनीतिक प्रभाव और आगे की स्थिति
- छवि पर असर:
यह विवाद RJD की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर जब NDA विकास योजनाओं पर जोर दे रहा है। - संभावित बगावत:
मधुबन सीट से मदन शाह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ने पर विचार कर रहे हैं या BJP में शामिल हो सकते हैं। - RJD की प्रतिक्रिया:
सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव ने आंतरिक बैठक बुलाई है, लेकिन अभी तक सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। - चुनावी परिप्रेक्ष्य:
पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है; मतदान 6 से 11 नवंबर के बीच होगा।
निष्कर्ष
यह विवाद बिहार की राजनीति में “टिकट बिक्री” की कथित संस्कृति को उजागर करता है।
जहां मेहनती कार्यकर्ता किनारे किए जा रहे हैं और टिकट पैसे के बल पर बांटे जा रहे हैं।
अब देखना यह है कि RJD इस आंतरिक संकट को कैसे संभालती है और क्या पार्टी अनुशासन बरकरार रह पाता है।














