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कांग्रेस vs RJD: सीट बंटवारे पर तनाव – विस्तृत रिपोर्ट

By Ayush

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पटना, 19 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन लगभग पूरे हो चुके हैं, लेकिन विपक्षी महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) में सीट बंटवारे को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच कुल सीटों की संख्या के साथ-साथ कहलगांव, नाथनगर, वैशाली और लालगंज जैसी अहम सीटों पर भी टकराव चरम पर है।

RJD कांग्रेस को 55 से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं है, जबकि कांग्रेस 65–70 सीटों की मांग पर अड़ी हुई है। यह मतभेद न केवल गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से एनडीए के लिए फायदा बनता जा रहा है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के बीच हाल की बातचीत में भी कोई सहमति नहीं बन सकी है, जिससे कई सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।


विवाद की शुरुआत

यह टकराव जून 2025 में शुरू हुआ जब कांग्रेस ने महागठबंधन में 90 सीटों की मांग रखी। RJD ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सीट बंटवारा “सामूहिक सहमति” से होगा।
सितंबर में तेजस्वी यादव की ‘बिहार अधिकार यात्रा’ और कांग्रेस की ‘जन अधिकार यात्रा’ के शेड्यूल को लेकर भी तनाव बढ़ा।
अक्टूबर में नामांकन की अंतिम तिथि (17 अक्टूबर) नजदीक आने पर दिल्ली और पटना में लगातार बैठकें हुईं।

13 अक्टूबर को मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई कांग्रेस बैठक में तय किया गया कि पार्टी “कमजोर सीटें” नहीं लेगी। लेकिन RJD ने बिना सहमति के कई उम्मीदवारों को सिंबल जारी कर दिए, जिससे विवाद गहराया।


सीटों की संख्या पर मतभेद

2020 में कांग्रेस को 70 सीटें मिली थीं, जिनमें से उसने 19 जीती थीं। इस बार RJD ने खुद के लिए 135 सीटों का दावा किया है और कांग्रेस को सिर्फ 55–58 देने की बात कही है।
कांग्रेस का तर्क है कि उसके संगठन और मुस्लिम–यादव बेल्ट में पकड़ को देखते हुए कम से कम 65 सीटें मिलनी चाहिए।
वाम दलों (CPI-ML को 31 सीटें) और VIP (मुकेश सहनी को 16 सीटें) के लिए भी जगह निकालने के चलते RJD दबाव में है।

सूत्रों के अनुसार, 14 अक्टूबर को तेजस्वी यादव ने दिल्ली में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से लंबी बातचीत की, लेकिन राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो सकी।

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विवादित सीटें

मुख्य टकराव 5 से 8 सीटों पर है, जिन पर दोनों दल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं:

  • कहलगांव (भागलपुर): RJD ने रजनीश यादव को टिकट दिया, कांग्रेस इसे अपनी पारंपरिक सीट मानती है।
  • नाथनगर (भागलपुर): 2020 में RJD यहां से लड़ी थी, लेकिन कांग्रेस इस बार दावा कर रही है।
  • वैशाली: कांग्रेस के संजीव कुमार बनाम RJD के अजय कुशवाहा।
  • लालगंज: RJD ने मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को टिकट दिया, कांग्रेस ने आदित्य कुमार राजा को।
  • बछवाड़ा, गौरा-बौरम, रोसरा और बिहारशरीफ जैसी सीटों पर भी दोनों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं, जिससे कार्यकर्ता भ्रमित हैं कि प्रचार किसका करें।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं

राहुल गांधी व तेजस्वी यादव: राहुल ने 17 अक्टूबर को लालू प्रसाद से फोन पर बात की, लेकिन मतभेद बने रहे। तेजस्वी ने कहा, “सीट बंटवारा जल्द तय होगा, कोई दरार नहीं।”

कांग्रेस का रुख: पवन खेड़ा ने कहा, “RJD के एकतरफा फैसले से गठबंधन कमजोर हो रहा है। हम 65 सीटों से कम पर नहीं मानेंगे।”
RJD का जवाब: प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी बोले, “2020 का फॉर्मूला दोहराना संभव नहीं। RJD सबसे बड़ा दल है, इसलिए 135 सीटें जायज हैं।”

अन्य दलों की स्थिति: CPI(ML) ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी कर बाद में विवाद के कारण रोक दी। VIP के मुकेश सहनी ने RJD पर “छोटे दलों को दबाने” का आरोप लगाया।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

X (पूर्व ट्विटर) पर #RJDvsCongress और #MahagathbandhanCrack ट्रेंड कर रहे हैं।
कई यूजर्स ने लिखा कि गठबंधन की अंदरूनी खींचतान से NDA को सीधा फायदा मिलेगा।


व्यापक संदर्भ और संभावनाएं

2020 में भी सीट बंटवारे पर यही खींचतान हुई थी, लेकिन अंततः समझौता हुआ। इस बार AIMIM और JMM जैसे नए सहयोगियों की वजह से मामला और जटिल हो गया है।
RJD ने 51 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए, जबकि कांग्रेस ने विवादित सीटों पर अपने सिंबल जारी कर दिए हैं।
NDA ने इसे “लठबंधन” करार दिया है, जबकि BJP–JDU में सीट बंटवारा पहले ही तय हो चुका है (101–101)।


राजनीतिक असर

यह विवाद महागठबंधन के वोटबैंक को विभाजित कर सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां मुस्लिम–यादव मतदाता निर्णायक हैं।
पहले चरण की 90 सीटों में से कई पर यह प्रभाव दिख सकता है।

आगामी कदम: 20 अक्टूबर को पटना में गठबंधन की केंद्रीय बैठक बुलाई गई है। अगर तब तक उम्मीदवारों ने नामांकन वापस नहीं लिए, तो कई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं।


यह टकराव “गठबंधन की मजबूरी बनाम दलगत महत्वाकांक्षा” को उजागर करता है। आने वाले दिनों में बिहार की सियासत इसी सुलह या टकराव पर निर्भर करेगी।

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