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नीतीश कुमार का रिकॉर्ड तोड़ कीर्तिमान: 10वीं बार मुख्यमंत्री शपथ पर विश्व मान्यता

By Ayush

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बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण आया है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10वीं बार शपथ लेकर न केवल राज्य बल्कि पूरे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया।
यह उपलब्धि 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए की शानदार जीत के बाद मिली, जहाँ:

  • जेडीयू – 85 सीटें
  • बीजेपी – 89 सीटें
  • एनडीए कुल – 202 सीटें

20 नवंबर 2025, पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार ने 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली।
इस असाधारण उपलब्धि पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन ने उन्हें औपचारिक बधाई दी और अपने रिकॉर्ड में शामिल किया।


पृष्ठभूमि: नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

  • पहली बार शपथ: 3 मार्च 2000 (7 दिनों बाद इस्तीफा)
  • 2005 से लगातार बिहार का नेतृत्व
  • विभिन्न गठबंधनों (एनडीए, महागठबंधन) के साथ उतार-चढ़ाव
  • 2022: पुनः एनडीए में वापसी
  • 2025 चुनाव में विपक्ष महागठबंधन केवल 35 सीटों पर सिमटा

10 बार शपथ लेना उनकी राजनीतिक स्थिरता, दृढ़ता, और जनाधार का प्रमाण है।


विश्व रिकॉर्ड की मान्यता: वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का पत्र

5 दिसंबर 2025, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन ने लिखित बधाई भेजी:

“1947 से 2025 तक, आप देश के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने दस बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। यह भारतीय लोकतंत्र का दुर्लभ और ऐतिहासिक क्षण है।”

संस्था जल्द ही आधिकारिक प्रमाण-पत्र देगी।
जेडीयू नेता संजय झा ने X पर पोस्ट कर इसे “बिहार के लिए गर्व” बताया।

Also Read बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र 2025: चौथे दिन हंगामा और ‘वोट चोरी’ के आरोपों का दौर


प्रतिक्रियाएं: राजनीतिक हलकों में सराहना

जेडीयू नेताओं की प्रतिक्रिया

  • मनीष वर्मा: “नीतीश की दूरदर्शी सोच और सुशासन ने जनता का विश्वास जीता।”
  • संजय झा: “यह व्यक्तिगत नहीं, बिहार की विकास यात्रा का सम्मान है।”

एनडीए प्रतिक्रिया

  • बीजेपी ने इसे “स्थिर और सफल शासन” का प्रतीक कहा।

विपक्ष

  • कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं,
  • सोशल मीडिया में इसे “राजनीतिक चतुराई” बताया गया।

सोशल मीडिया

  • लाइव सिटीज: “दस बार शपथ लेकर बनाया रिकॉर्ड।”
  • #NitishKumarRecord ट्रेंड
  • स्टेट मिरर न्यूज: “वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की मान्यता मिली।”

महत्व: बिहार के विकास और लोकतंत्र के लिए क्या अर्थ?

यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि:

  • शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कों, महिला सशक्तिकरण में सुधार
  • शराबबंदी, सड़क निर्माण, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान
  • बिहार की वैश्विक छवि सुधरी
  • राजनीतिक विश्लेषकों का मत:
    • “यह जनता का भरोसा दिखाता है, जो बदलते गठबंधनों में भी कायम रहा।”

यह रिकॉर्ड निवेश, विकास और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ा सकता है।


भविष्य की योजनाएं: नई सरकार का एजेंडा

नीतीश कुमार के अनुसार मुख्य लक्ष्य:

  • रोजगार सृजन
  • बाढ़ नियंत्रण
  • डिजिटल बिहार
  • 91,000 करोड़ का अनुपूरक बजट: युवाओं के लिए नौकरी योजनाएं

जेडीयू नेताओं को उम्मीद है कि यह रिकॉर्ड बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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