घटना का विवरण
15 दिसंबर 2025 को पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 1,283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र दिए गए, जिनमें:
- 685 आयुर्वेदिक
- 393 होम्योपैथिक
- 205 यूनानी डॉक्टर शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान यूनानी डॉक्टर डॉ. नुसरत परवीन, जो हिजाब/नकाब पहने मंच पर नियुक्ति पत्र लेने आई थीं, को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी ओर इशारा करते हुए कहा, “ये क्या है?” और कथित तौर पर उनका हिजाब नीचे खींच दिया, जिससे उनका चेहरा सार्वजनिक रूप से उजागर हो गया। डॉ. नुसरत परवीन इस दौरान असहज और स्तब्ध नजर आईं।
घटना का वीडियो सामने आया, जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें रोकने की कोशिश करते दिखे, जबकि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और कुछ अन्य लोग हंसते नजर आए। वीडियो के वायरल होते ही देशभर में विवाद फैल गया।
विपक्ष और आलोचकों की प्रतिक्रियाएं
राजनीतिक दल
- आरजेडी और कांग्रेस ने इस कृत्य को “घिनौना और बेशर्म” बताया।
- कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सवाल उठाया कि बिहार में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं।
मुस्लिम संगठन और नेता
- इमारत-ए-शरिया, जमात-ए-इस्लामी हिंद सहित कई संगठनों ने इसे सार्वजनिक अपमान बताया और बिना शर्त माफी की मांग की।
- पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने कड़ी निंदा की। इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर में एफआईआर भी दर्ज कराई।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- अल जजीरा ने इस घटना को इस्लामोफोबिया से जोड़कर रिपोर्ट किया।
- पाकिस्तान ने इसे “गंभीर रूप से परेशान करने वाला” बताया।
- पाकिस्तान आधारित एक गैंगस्टर द्वारा धमकी देने की खबरें भी सामने आईं।
अन्य प्रतिक्रियाएं
- लेखक जावेद अख्तर, जो परदे के विरोधी रहे हैं, उन्होंने भी घटना की निंदा की और माफी की मांग की।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे महिलाओं की गरिमा पर हमला बताया।
- कोलकाता सहित कई शहरों में “मेरा हिजाब मेरी पसंद” के नारे के साथ प्रदर्शन हुए।
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समर्थन और बचाव
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने कुछ गलत नहीं किया और यह एक अभिभावक जैसा व्यवहार था। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि पहचान के लिए कई जगहों पर चेहरा दिखाना पड़ता है।
बिहार सरकार के मंत्री
- स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने इसे पिता जैसा स्नेह बताया।
- कुछ नेताओं ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण में नीतीश कुमार का योगदान देखा जाना चाहिए।
एनडीए का पक्ष
घटना को राजनीतिक साजिश बताया गया। कुछ मुस्लिम समर्थकों ने भी नीतीश कुमार के समर्थन में बयान दिए।
डॉ. नुसरत परवीन का पक्ष
- शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वह आहत होकर नौकरी छोड़ सकती हैं।
- ताजा अपडेट के अनुसार, उनकी एक क्लासमेट ने बताया कि डॉ. नुसरत परवीन नीतीश कुमार से नाराज नहीं हैं और 20 दिसंबर 2025 को नौकरी जॉइन करेंगी।
- स्वास्थ्य विभाग ने भी नौकरी छोड़ने की खबरों को अफवाह बताया है।
अन्य प्रभाव और स्थिति
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
- सोशल मीडिया पर महिलाओं की गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता और पहचान सत्यापन को लेकर तीखी बहस चल रही है।
- अब तक मुख्यमंत्री की ओर से कोई आधिकारिक माफी नहीं आई है, हालांकि जेडीयू ने अल्पसंख्यकों के लिए उनके कार्यों का हवाला दिया है।
निष्कर्ष
यह विवाद महिलाओं की स्वायत्तता, धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक गरिमा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बड़े सवाल खड़े करता है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर राय बंटी हुई है, लेकिन आलोचना का स्वर अधिक मुखर दिखाई देता है। आगे के घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।









