पटना, 23 जनवरी 2026 — आज पूरे बिहार में बसंत पंचमी (वसंत पंचमी) का पावन त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जा रहा है। यह दिन माघ मास की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि पर आता है, जब विद्या, बुद्धि, वाणी, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। बिहार में यह त्योहार विशेष रूप से छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरस्वती पूजा यहां स्कूलों, कॉलेजों, घरों और सामुदायिक पंडालों में धूमधाम से मनाई जाती है।
मुख्य विशेषताएँ और उत्सव
- स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी: बिहार में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल-कॉलेज आज पूर्ण अवकाश पर हैं। शिक्षा विभाग के कैलेंडर के अनुसार, बसंत पंचमी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। कई निजी स्कूलों में भी छुट्टी या आधे दिन की छुट्टी के साथ विशेष सरस्वती पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। छात्र-छात्राएं सफेद या पीले वस्त्र पहनकर पूजा में शामिल हुए।
- पूजा मुहूर्त और विधि: पटना और बिहार में सरस्वती पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहा (कुछ जगहों पर 7:13 AM से 12:33 PM)। पूरे दिन शुभ योग बने रहे, जिसमें 5 राजयोग सक्रिय थे। पूजा में पीले फूल, पीले वस्त्र, किताबें, वीणा, कलम-दवात और सफेद चंदन का उपयोग किया गया। भोग में केसरिया खीर, हलवा, पुआ, मालपुआ और फल चढ़ाए गए।
- उत्सव का स्वरूप:
- स्कूलों में सरस्वती प्रतिमा की स्थापना, आरती, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- छात्र-छात्राएं सफेद वस्त्रों में किताबें पूजते हुए मां से विद्या और सफलता की कामना करते हैं।
- घरों और पंडालों में सामूहिक पूजा, विशेषकर पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा आदि जिलों में।
- कई जगहों पर बच्चे किताबें और वाद्य यंत्र पूजते दिखे, साथ ही वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत।
- धार्मिक महत्व: मान्यता है कि बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का जन्म हुआ था। यह वसंत ऋतु का प्रतीक भी है, जब प्रकृति में हरियाली और फूल खिलते हैं। बिहार में इसे “सरस्वती पूजा” के रूप में ज्यादा जाना जाता है, जहां शिक्षा और ज्ञान पर फोकस रहता है।
बिहार में खास बातें
- पटना के कई स्कूलों और कॉलेजों (जैसे पटना कॉलेज, पटना यूनिवर्सिटी) में बड़े स्तर पर पूजा आयोजित की गई।
- छात्र संगठनों ने सफेद/पीले कपड़ों में रैलियां निकालीं और मां सरस्वती की जयकार लगाई।
- मौसम सुहावना होने से बाहर खुले में पूजा और कार्यक्रम ज्यादा हुए।
- कई जगहों पर किताबों का दान और गरीब बच्चों को किताबें बांटी गईं।
यह त्योहार बिहार में शिक्षा और संस्कृति का प्रतीक है। आज के दिन मां सरस्वती से प्रार्थना की जाती है कि सभी को ज्ञान, बुद्धि और सफलता मिले।









