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बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र: तीसरे दिन हंगामा और राज्यपाल का अभिभाषण

By Ayush

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पटना, 3 दिसंबर 2025: बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र (1–5 दिसंबर) आज अपने तीसरे दिन में प्रवेश किया। यह 18वीं विधानसभा का पहला सत्र है, जिसमें नए विधायकों का शपथ ग्रहण, स्पीकर का चुनाव और राज्यपाल का अभिभाषण जैसे अहम कार्य शामिल हैं। आज राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सेंट्रल हॉल में दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। हालांकि, विपक्ष ने पूरे समय हंगामा किया और सरकार पर “बुलडोजर सरकार” का आरोप लगाया। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अनुपस्थित रहे, जिससे राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई।


सत्र की पृष्ठभूमि और आज की कार्यवाही

  • शीतकालीन सत्र एनडीए की प्रचंड जीत के बाद शुरू हुआ।
  • 1 दिसंबर को 236 विधायकों ने शपथ ली।
  • 2 दिसंबर को भाजपा विधायक डॉ. प्रेम कुमार निर्विरोध स्पीकर चुने गए।
  • 3 दिसंबर को सुबह 11:30 बजे संयुक्त बैठक शुरू हुई और राज्यपाल ने अभिभाषण दिया।

राज्यपाल का अभिभाषण: विकास और सुशासन पर फोकस

मुख्य बिंदु:

  • रोजगार: एक करोड़ नौकरियों के लक्ष्य पर तेजी से काम।
  • विकास योजनाएँ: पीएम मोदी के बिहार दौरे से परियोजनाओं में तेजी।
  • प्रशासनिक सुधार: डिजिटल विधानसभा, पेपरलेस वर्क, सुरक्षा में सुधार।
  • भविष्य की योजनाएँ: कानून-व्यवस्था, बजट प्रबंधन और शासन सुधार पर जोर।

अभिभाषण गरिमापूर्ण रहा, लेकिन विपक्षी हंगामे ने बाधा डाली।


विपक्ष का हंगामा: “बुलडोजर वाली सरकार” का आरोप

  • आरजेडी, कांग्रेस और AIMIM विधायकों ने नारेबाजी की।
  • आरोप: सरकार विपक्षी नेताओं के घरों पर बुलडोजर चलवा रही है।
  • हंगामा के कारण कार्यवाही कुछ देर बाधित रही।
  • स्पीकर ने कई बार शांति की अपील की।

एक विपक्षी विधायक ने कहा:
“यह अभिभाषण विकास का नहीं, दमन का दस्तावेज है।”

Also Read बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र 2025: विस्तृत अपडेट


तेजस्वी यादव अनुपस्थित: राजनीतिक हलचल

  • तेजस्वी प्रसाद यादव सदन में मौजूद नहीं थे।
  • आरजेडी का कहना—व्यक्तिगत कारण।
  • राजनीतिक गलियारों में—रणनीति बैठक या सामरिक अनुपस्थिति की चर्चा।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

  • पटना में सत्र के दौरान धारा 163 लागू।
  • विधानसभा परिसर में कड़ी सुरक्षा।
  • पेपरलेस कार्य—डिजिटल एमएलए सिस्टम लागू।

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र सरकार के लिए “सुशासन एजेंडा” पेश करने का मौका है, लेकिन विपक्ष का आक्रामक रुख आने वाले दिनों में बहस को और तीखा बना सकता है।


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