बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गठन के लगभग दो महीने बाद अब पहले मंत्रिमंडल विस्तार की प्रबल संभावना बन गई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार यह विस्तार 14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) के बाद किसी भी दिन हो सकता है। खरमास की अवधि 15 जनवरी तक मानी जाती है, इसलिए उसके बाद शुभ कार्य शुरू करने की परंपरा के अनुसार यह तारीख अहम मानी जा रही है।
मुख्य बिंदु
- नए मंत्रियों की संख्या: कुल 9 नए मंत्री शपथ ले सकते हैं।
- जदयू कोटे से: 6 मंत्री
- भाजपा कोटे से: 3 मंत्री
- कुल मंत्रियों की संख्या: विस्तार के बाद मुख्यमंत्री सहित कुल 35 मंत्री (अधिकतम सीमा 36)।
- फोकस क्षेत्र:
- जदयू का जोर अति पिछड़े वर्ग (EBC) और सामाजिक संतुलन पर।
- भाजपा नए चेहरे, क्षेत्रीय संतुलन और युवा नेताओं को प्राथमिकता दे सकती है।
- पृष्ठभूमि:
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया दिल्ली यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व से इस मुद्दे पर चर्चा।
- गठबंधन दलों के बीच सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है।
क्यों हो रहा है कैबिनेट विस्तार?
- कई मंत्री एक से अधिक विभाग संभाल रहे हैं, जिससे प्रशासनिक दबाव बढ़ा है।
- भाजपा नेता नितिन नवीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद इस्तीफे से एक पद खाली हुआ।
- सामाजिक और जातिगत संतुलन साधने तथा विभिन्न क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता।
- एनडीए फॉर्मूले के अनुसार भाजपा को 17, जदयू को 15 (सीएम सहित) और अन्य सहयोगियों को सीमित पद—वर्तमान में 9–10 पद खाली हैं।
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संभावित राजनीतिक प्रभाव
- बिहार की राजनीति में नई हलचल।
- अति पिछड़े वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने से एनडीए का जनाधार मजबूत हो सकता है।
- मंत्रियों के नामों की अंतिम सूची गोपनीय, लेकिन जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान।
यह जानकारी विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों से संकलित है। परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए ताजा अपडेट के लिए प्रमुख न्यूज प्लेटफॉर्म पर नजर रखें। कैबिनेट विस्तार होने की स्थिति में शपथ ग्रहण समारोह पटना के राजभवन में आयोजित होने की संभावना है।









