पटना, 14 अक्टूबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चुनाव आयोग (ECI) ने महिलाओं की गोपनीयता और मताधिकार की सुरक्षा के लिए अहम कदम उठाया है।
अब ‘पर्दानशीं’ यानी बुर्का या पर्दा पहनने वाली महिलाओं के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपनी पहचान सत्यापित करा सकें और बिना झिझक वोट डाल सकें।
यह व्यवस्था 10 अक्टूबर 2025 को जारी निर्देशों के तहत लागू की जा रही है, जो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के 1994 के ऐतिहासिक फैसले पर आधारित है।
पृष्ठभूमि और उद्देश्य
क्यों जरूरी?
बिहार के कई मुस्लिम बहुल जिलों – जैसे सीवान, किशनगंज, अररिया – में बड़ी संख्या में महिलाएं बुर्का या पर्दा पहनती हैं।
इससे पहचान सत्यापन में दिक्कत आती है और कई बार नकली वोटिंग का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, पुरुष अधिकारियों की मौजूदगी में ये महिलाएं असहज महसूस करती हैं, जिससे महिला मतदान प्रतिशत प्रभावित होता है।
ECI का लक्ष्य:
- महिला मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाना (बिहार में महिला वोटर 3.7 करोड़ से अधिक)
- निष्पक्ष और समावेशी चुनाव सुनिश्चित करना
ऐतिहासिक संदर्भ:
1994 में टी.एन. शेषन ने यह निर्देश दिया था कि जहां महिला मतदाता 50% या अधिक हों और पर्दा प्रथा प्रचलित हो, वहां कम से कम एक महिला पोलिंग अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद हो।
अब आयोग ने इस प्रावधान को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था का विवरण
चुनाव आयोग की 10 अक्टूबर की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, बुर्का या पर्दा पहनने वाली महिलाओं की सुविधा के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष कदम उठाए गए हैं:
| व्यवस्था का प्रकार | विवरण | उद्देश्य |
|---|---|---|
| महिला अधिकारी | हर केंद्र पर कम से कम 1 महिला पोलिंग अधिकारी | असहजता कम करना |
| आंगनवाड़ी कार्यकर्ता | सभी 72,400 मतदान केंद्रों पर तैनाती | पहचान सत्यापन में सहायता |
| निजी एनक्लोजर (गुप्त कक्ष) | महिला अधिकारी की मौजूदगी में पहचान सत्यापन | गोपनीयता सुनिश्चित करना |
| वैकल्पिक आईडी | वोटर आईडी के अलावा 12 प्रकार की आईडी मान्य | पहुंच आसान बनाना |
मुख्य बिंदु:
- महिला पोलिंग अधिकारी या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से बुर्का हटाकर पहचान जांच होगी।
- प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय होगी – किसी पुरुष अधिकारी की मौजूदगी नहीं।
- जहां महिला मतदाता अधिक हों, वहां पूरा स्टाफ महिलाओं का होगा।
- मतदान केंद्रों पर अलग कतारें, रैम्प, शौचालय और पीने का पानी की भी व्यवस्था की गई है।
यह व्यवस्था बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरणों (6 और 11 नवंबर) में लागू होगी। मतगणना 14 नवंबर 2025 को होगी।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: समर्थन और विरोध
समर्थन:
- बिहार BJP अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने 4 अक्टूबर को मांग की थी कि पर्दानशीं महिलाओं की पहचान सही तरीके से सुनिश्चित की जाए ताकि नकली वोटिंग रोकी जा सके।
- निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद ने 15 अक्टूबर को कहा, “यह कदम निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए जरूरी है।”
विरोध:
- समाजवादी पार्टी (SP) ने 13 अक्टूबर को इसे “महिलाओं को डराने वाला कदम” बताया और निर्देश वापस लेने की मांग की।
- कुछ विपक्षी दलों जैसे RJD और कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक चाल” कहा।
ECI का बचाव (16 अक्टूबर):
आयोग ने कहा कि यह कदम “महिलाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण व रूढ़िवादी इलाकों में मतदान बढ़ाने” के लिए है।
संभावित प्रभाव और अपेक्षाएं
- महिला मतदान प्रतिशत:
2020 में बिहार में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 59.5% था, जो पुरुषों (58.5%) से अधिक था। आयोग को उम्मीद है कि इस बार यह 65% तक पहुंच सकता है। - चुनौतियां:
कुछ संगठनों ने चिंता जताई कि पहचान जांच की प्रक्रिया से कुछ महिलाएं मतदान से दूर रह सकती हैं।
इस पर ECI ने ट्रेनिंग कैंप और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए हैं। - सोशल मीडिया प्रतिक्रिया:
X (पूर्व ट्विटर) पर #BurqaVotersBihar ट्रेंड कर रहा है। अधिकांश पोस्ट इस कदम का समर्थन कर रहे हैं।
निष्कर्ष
यह फैसला चुनाव आयोग की समावेशी नीति को दर्शाता है।
बुर्का या पर्दा पहनने वाली महिलाएं अब मतदान केंद्रों पर सम्मान और सुरक्षा के साथ अपना वोट डाल सकेंगी।
यह न केवल महिला सशक्तिकरण, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता की दिशा में भी एक अहम कदम है।














