पटना, 15 अक्टूबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की गर्मी के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने बुधवार को साफ कर दिया कि वे इस बार किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से चुनावी मैदान में उतरने की बजाय पार्टी संगठन और उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने पर ध्यान देंगे।
प्रशांत किशोर ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा,
“बिहार की जनता पर मेरा पूरा भरोसा है, लेकिन यह मेरा व्यक्तिगत फैसला है। मैं सभी 243 सीटों से लड़ रहा हूं — उम्मीदवारों को तैयार करके, प्रचार करके।”
इस बयान ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है, क्योंकि कई महीनों से चर्चा थी कि वे राघोपुर या करगहर सीट से तेजस्वी यादव के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं।
फैसले के पीछे की रणनीति
किशोर ने बताया कि चुनाव लड़ने से उनका ध्यान संगठन विस्तार से भटक सकता था। जन सुराज पहली बार चुनाव मैदान में है और पार्टी को बूथ-लेवल पर मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा,
“अगर मैं एक सीट से लड़ता, तो बाकी 242 सीटों पर फोकस कम हो जाता। पार्टी के हित में यह फैसला लिया गया है।”
जन सुराज ने अब तक दो सूचियों में कुल 80 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें पीके का नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है “243 सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना।”
जन सुराज का लक्ष्य: या तो जीत या हार
किशोर ने खुलकर कहा,
“या तो हम शानदार जीत हासिल करेंगे या बुरी तरह हारेंगे। अगर हमें 150 से कम सीटें मिलीं, तो इसे मैं अपनी व्यक्तिगत हार मानूंगा।”
उन्होंने एनडीए और महागठबंधन दोनों पर निशाना साधा —
“एनडीए में सीट बंटवारे की अराजकता है, महागठबंधन में खींचतान। हम पलायन, रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर लड़ रहे हैं।”
साथ ही उन्होंने वादा किया कि अगर जन सुराज की सरकार बनती है, तो भ्रष्टाचारियों पर सख्त कार्रवाई के लिए नया कानून लाया जाएगा।
राघोपुर सीट से जुड़े सवालों पर जवाब
राघोपुर सीट से तेजस्वी यादव के खिलाफ लड़ने की अटकलों पर उन्होंने कहा,
“राघोपुर यादव बहुल क्षेत्र है, लेकिन हम मुद्दों पर लड़ेंगे।”
जन सुराज ने यहां से चंचल कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। यह फैसला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है — आरजेडी समर्थक इसे “पीके की हार” बता रहे हैं, जबकि जन सुराज कार्यकर्ता इसे “रणनीतिक कदम” कह रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
महागठबंधन:
तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया —
“प्रशांत किशोर का फैसला उनकी रणनीति का हिस्सा है। बिहार की जनता विकास के लिए वोट देगी।”
एनडीए:
जेडीयू नेता ने कहा कि “पीके का न लड़ना उनकी कमजोरी दिखाता है”, जबकि चिराग पासवान ने उन्हें “नए विकल्प की जरूरत बताने वाला नेता” कहा।
विश्लेषकों का मत:
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह कदम रणनीतिक रूप से समझदारी भरा है — वे “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, 150 सीटों का लक्ष्य अत्यधिक महत्वाकांक्षी माना जा रहा है।
सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर हैशटैग #PrashantKishorNotContesting ट्रेंड कर रहा है।
कुछ प्रतिक्रियाएं:
- “पीके ने चुनाव न लड़कर बिहार को निराश किया।”
- “पीके 243 सीटों से लड़ रहे हैं — अपने उम्मीदवारों के जरिए।”
- “यह रणनीति नहीं, डर है!”
जन सुराज पार्टी ने इस दौरान कई प्रचार वीडियो जारी किए, जिनमें किशोर पार्टी की विचारधारा समझाते नजर आ रहे हैं।
चुनावी परिदृश्य और आगे की राह
बिहार में चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे, नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, जन सुराज को 10–20% वोट मिलने की संभावना है, लेकिन पूर्ण बहुमत मुश्किल दिख रहा है।
किशोर ने कहा,
“अगर हार हुई, तो मैं सड़क पर लौटूंगा — जनता के बीच। लेकिन जीत हुई, तो बिहार की सियासत बदल जाएगी।”
यह फैसला बिहार चुनाव 2025 में जन सुराज के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
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