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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: समस्तीपुर VVPAT स्लिप विवाद पर विस्तृत अपडेट

By Ayush

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: समस्तीपुर VVPAT स्लिप विवाद पर विस्तृत अपडेट
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8 नवंबर 2025 | पटना/समस्तीपुर:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण (6 नवंबर) के मतदान के दो दिन बाद समस्तीपुर जिले में एक बड़ा विवाद सामने आया।
सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र के शीतलपट्टी गांव और केएसआर (कमला शंकर रामायण) कॉलेज के पास सड़क किनारे तथा कूड़े के ढेर में हजारों VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) स्लिप्स बिखरी हुई पाई गईं।

ये वही पर्चियां हैं जो EVM से निकलती हैं और वोटर को यह सत्यापित करने का अवसर देती हैं कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया।
इस घटना ने विपक्ष को “वोट चोरी” और “चुनावी धांधली” के आरोप लगाने का मौका दिया, जबकि प्रशासन और चुनाव आयोग ने इसे “मॉक पोल” (नकली मतदान अभ्यास) की पर्चियां बताकर साधारण लापरवाही बताया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तत्काल सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) को निलंबित किया और FIR दर्ज करने के निर्देश दिए।
यह विवाद अब बिहार चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है, खासकर तब जब राज्य में 64.66% रिकॉर्ड मतदान हुआ था।


घटना का पूरा विवरण: कब, कहां और कैसे मिलीं पर्चियां

स्थान: सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र, शीतलपट्टी गांव, केएसआर कॉलेज के पास
समय: 8 नवंबर की सुबह
संख्या: अनुमानित 5,000 से अधिक पर्चियां

स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क किनारे और कूड़े के ढेर में ये पर्चियां देखीं और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ये मॉक पोल पर्चियां थीं, जिनमें “कमल”, “लालटेन” जैसे प्रतीक और डमी वोटरों के नाम छपे थे —
अर्थात, इनमें कोई वास्तविक मतदान डेटा नहीं था।

मॉक पोल का उद्देश्य:
EVM और VVPAT सिस्टम की जांच करना।
इन पर्चियों को बाद में सुरक्षित रूप से नष्ट या स्टोर करना अनिवार्य है।

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान:
स्थानीय निवासी रामू पासवान ने कहा —

“सुबह 7 बजे सफाई के दौरान ये पर्चियां दिखीं। इतनी बिखरी थीं कि लगा कोई जानबूझकर फेंक गया।”

एक अन्य ग्रामीण ने कहा —

“अगर स्लिप्स सड़क पर फेंकी जा सकती हैं, तो वोट भी बदले जा सकते हैं।”

प्रशासन की प्रतिक्रिया:
डीएम रोशन कुशवाहा और एसपी अरविंद प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे।
डीएम ने कहा —

“ये मॉक पोल की पर्चियां हैं, कोई धांधली नहीं। लेकिन लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

प्रमुख तथ्यविवरण
कुल पर्चियां5,000+ (अनुमानित)
प्रकारमॉक पोल स्लिप्स
स्थानशीतलपट्टी गांव, सरायरंजन विधानसभा
मतदान तिथि6 नवंबर 2025
सोशल मीडिया प्रभाव1 लाख+ व्यूज (मुख्यतः X पर)

Also Read बिहार विधानसभा चुनाव 2025: पहले चरण की वोटिंग पर विस्तृत प्रतिक्रियाएं


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष का हमला, एनडीए का बचाव

महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस)

आरजेडी ने अपने X हैंडल पर लिखा —

“समस्तीपुर में EVM-VVPAT पर्चियां सड़क पर मिलीं। क्या यह वोट चोरी का सबूत नहीं?”

तेजस्वी यादव ने कहा —

“यह EVM साजिश का प्रमाण है। चुनाव आयोग भाजपा का एजेंट बन गया है।”

कांग्रेस के उदय भानु चिब ने वीडियो साझा करते हुए कहा —

“जब वोट की पर्चियां सड़क पर मिलें, तो समझिए वोट की चोरी अब शक नहीं, हकीकत है।”

राजस्थान यूथ कांग्रेस और अन्य नेताओं ने भी इसे “लोकतंत्र पर हमला” कहा।


एनडीए (भाजपा-जेडीयू)

सम्राट चौधरी (भाजपा) ने कहा —

“ये मॉक पोल की पुरानी पर्चियां हैं। विपक्ष हार के डर से अफवाहें फैला रहा है।”

जेडीयू ने इसे “तुच्छ घटना” बताया और कहा कि विपक्ष EVM विरोधी प्रचार फैला रहा है।


जन सुराज (प्रशांत किशोर)

प्रशांत किशोर ने कहा —

“यह प्रशासनिक लापरवाही है, लेकिन पारदर्शिता पर प्रश्न उठाती है। चुनाव आयोग को सभी VVPAT स्लिप्स की 100% जांच करनी चाहिए।”


चुनाव आयोग और प्रशासन की कार्रवाई

CEC ज्ञानेश कुमार ने समस्तीपुर डीएम को तत्काल जांच के आदेश दिए।
ARO को निलंबित किया गया और FIR दर्ज की गई।

FIR विवरण:

  • धारा 188 (लापरवाही से सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा)
  • धारा 425 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना)

जांच: मजिस्ट्रेटीय जांच समिति गठित की गई।
ECI का बयान:

“ये पर्चियां मॉक पोल की थीं। वास्तविक मतदान की सभी VVPAT स्लिप्स सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में हैं।”


संभावित प्रभाव और आगे की स्थिति

  • यह विवाद पहले चरण की 121 सीटों के परिणामों पर असर डाल सकता है।
  • विपक्ष VVPAT-EVM वेरिफिकेशन की मांग बढ़ा सकता है।
  • सोशल मीडिया पर #VVPATScamBihar और #BiharElections ट्रेंड कर रहे हैं।
  • चुनाव आयोग ने दूसरे चरण से पहले VVPAT हैंडलिंग पर सर्कुलर जारी किया है।
  • बिहार के 90,712 मतदान केंद्रों पर निगरानी बढ़ाई गई है।

विशेषज्ञों की राय:
राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने कहा —

“यह लापरवाही है, लेकिन विपक्ष इसे मुद्दा बनाएगा। पारदर्शिता के लिए कम से कम 5% VVPAT वेरिफिकेशन जरूरी है।”


निष्कर्ष

यह विवाद बिहार चुनाव के बीच विश्वास और पारदर्शिता की कसौटी बन गया है।
14 नवंबर की मतगणना से पहले यह मुद्दा और गर्म हो सकता है।
चुनाव आयोग की त्वरित कार्रवाई के बावजूद जनता और विपक्ष की शंकाएं बनी हुई हैं।


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