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बिहार में साक्षरता दर में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार

By Ayush

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नालंदा की विरासत के बावजूद शिक्षक-छात्र अनुपात बना संकट; चुनाव 2025 में युवाओं ने मोदी की लोकप्रियता की परीक्षा ली

पटना, 20 नवंबर 2025

बिहार, जो कभी प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की ज्ञान परंपरा के लिए विश्व प्रसिद्ध था, आज शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। 2011 की जनगणना में 61.8% रही साक्षरता दर 2025 में बढ़कर 74.3% हो गई है। इसके बावजूद शिक्षक-छात्र अनुपात, लिंग असमानता, गरीबी और बुनियादी ढांचे की कमी जैसी समस्याओं के कारण राज्य राष्ट्रीय औसत 80.9% से नीचे है।
हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में 18–25 वर्ष के युवा मतदाताओं ने इन्हीं मुद्दों को प्रखरता से उठाया। यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा था, लेकिन अंततः एनडीए ने विकास और कल्याण योजनाओं पर भरोसा दिलाते हुए जीत दर्ज की।


1. साक्षरता दर का सफर: 2011 से 2025 तक

  • 2011: कुल साक्षरता 61.8%
    • पुरुष: 71.2%
    • महिलाएं: 51.5%
  • 2025 (PLFS 2023–24 आधारित अनुमान): कुल साक्षरता 74.3%
    • पुरुष (शहरी): 83.2%
    • पुरुष (ग्रामीण): 72.1%
    • महिलाएं: लगभग 65%

राष्ट्रीय औसत 80.9% के बावजूद बिहार की वार्षिक प्रगति दर लगभग 12% आंकी गई है।
जिला-स्तर पर असमानता बड़ी चुनौती बनी हुई है:

  • उच्च साक्षरता: पटना (87.82%), रोहतास (80.36%)
  • निम्न साक्षरता: किशनगंज (61.05%), अररिया (64.95%), कटिहार (65.46%)

महिला साक्षरता स्वतंत्रता के समय 4.22% से बढ़कर 60.5% के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन पुरुषों की तुलना में 12.6% का अंतर अभी भी बना हुआ है।

ये सभी आंकड़े ASER, NSO और PLFS रिपोर्ट पर आधारित हैं।


2. नालंदा की विरासत बनाम वर्तमान चुनौतियां

नालंदा में 5वीं शताब्दी में 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे, परंतु आज की स्थिति चिंताजनक है:

शिक्षक-छात्र अनुपात

  • राष्ट्रीय आदर्श: 1:30
  • बिहार (ग्रामीण): 1:50 से 1:70
  • 40% स्कूलों में शिक्षक अनुपस्थिति
  • 25% प्राथमिक स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं

ड्रॉपआउट दर 20% से ऊपर है।

गरीबी और सामाजिक बाधाएं

  • 33% आबादी गरीबी रेखा से नीचे
  • जाति भेदभाव, बाल विवाह, मुस्लिम महिलाओं की साक्षरता 55% से कम
  • संसाधनों की कमी से सीखने की क्षमता प्रभावित

ग्रामीण-शहरी खाई

  • शहरी साक्षरता: 83.1%
  • ग्रामीण साक्षरता: 69.5%
    ऑनलाइन शिक्षा की कमी से कोविड के बाद यह खाई और गहरी हुई।

बेरोजगारी

  • बिहार में युवा बेरोजगारी 28%, राष्ट्रीय औसत 23% से अधिक।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि संसाधनों और नीतिगत कमियों को दूर नहीं किया गया तो 2030 तक “पूर्ण साक्षरता” का लक्ष्य असंभव होगा।

एक उपयोगकर्ता ने हाल ही में एक्स पर लिखा:
“बिहार की नवनिर्मित एनडीए सरकार से एक मांग—साक्षरता दर बदलनी चाहिए। शिक्षा को प्राथमिकता मिले तभी बिहार बदलेगा।”

Also Read मुजफ्फरपुर फर्जी सर्टिफिकेट घोटाला: विस्तृत अपडेट (19 नवंबर 2025)


3. चुनाव 2025: युवाओं ने दी ‘लिटमस टेस्ट’ वाली चुनौती

बिहार देश का सबसे युवा राज्य है—65% आबादी 35 वर्ष से कम।
74 मिलियन मतदाताओं में 40% जनरेशन Z हैं।

युवा मुद्दे

  • बेरोजगारी
  • पेपर लीक
  • माइग्रेशन
  • कोचिंग-केन्द्रित शिक्षा पर निर्भरता

2018–2022 के बीच बिहार में 400 से अधिक छात्र विरोध हुए—देश में सबसे उच्च संख्या।

राजनीतिक समीकरण

  • विपक्ष (आरजेडी-कांग्रेस): रोजगार व सामाजिक न्याय आधारित वादे
  • एनडीए:
    • “मुख्यमंत्री रोजगार योजना”
    • डिजिटल कनेक्टिविटी
    • पीएम मोदी का GYAN फॉर्मूला: गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी

युवा असंतोष मौजूद था, लेकिन स्थिरता और केंद्र की गारंटी योजनाओं ने चुनाव में बाजी पलट दी।
अंततः एनडीए 202 सीटें जीतने में सफल रही।


4. प्रमुख संकेतक (2011 बनाम 2025)

संकेतक20112025 (अनुमानित)प्रगति
कुल साक्षरता61.8%74.3%+12.5%
पुरुष साक्षरता71.2%82.5%+11.3%
महिला साक्षरता51.5%65.0%+13.5%
ग्रामीण59.8%69.5%+9.7%
शहरी75.0%83.1%+8.1%

5. आगे की दिशा: क्या हो सकता है सुधार?

नई एनडीए सरकार ने शिक्षा बजट में 20% बढ़ोतरी का वादा किया है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:

  • बड़े पैमाने पर शिक्षक भर्ती
  • डिजिटल क्लासरूम
  • लड़कियों और मुस्लिम महिलाओं पर विशेष फोकस
  • भवन, शौचालय, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
  • स्किल-आधारित शिक्षा में निवेश
  • नालंदा की विरासत के अनुरूप उच्च शिक्षा में सुधार

यदि यह कदम गंभीरता से उठाए गए, तो बिहार आने वाले वर्षों में न केवल साक्षरता बल्कि आर्थिक विकास में भी बड़ी छलांग लगा सकता है।

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