पटना, 5 अक्टूबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जेडीयू नेता ललन सिंह की पटना में हालिया बैठक गठबंधन के भीतर संतुलन बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
जीतन राम मांझी ने स्पष्ट कहा है कि नवरात्रि (13 अक्टूबर) के बाद सीट शेयरिंग फाइनल हो जाएगी। कुल 243 सीटों में से बीजेपी और जेडीयू को लगभग बराबर हिस्सा मिलने की संभावना है, जबकि छोटे सहयोगी जैसे चिराग पासवान की एलजेपी (आरवी), जीतन राम मांझी की एचएएम और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को 20 से 40 सीटें मिल सकती हैं।
यह फॉर्मूला 2024 लोकसभा चुनाव की तर्ज पर सर्वे-आधारित होगा, जिसमें बीजेपी ने 17, जेडीयू ने 16 और एलजेपी ने 5 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
बैकग्राउंड और हालिया बैठकें
एनडीए में सीट शेयरिंग की चर्चा अप्रैल 2025 से चल रही थी, लेकिन औपचारिक बातचीत जुलाई-अगस्त में शुरू हुई। बीजेपी ने सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में सर्वे कराया, जो सीट आवंटन और उम्मीदवार चयन का आधार बनेगा।
अमित शाह की अगस्त 2025 की दिल्ली बैठक में राज्य इकाई की आंतरिक कलह और एंटी-इनकंबेंसी पर फोकस रहा। इसके बाद 15 सितंबर के बाद बातचीत तेज हुई।
धर्मेंद्र प्रधान – ललन सिंह बैठक (4 अक्टूबर)
पटना में हुई इस बैठक में बीजेपी और जेडीयू ने “ब्रॉड अंडरस्टैंडिंग” पर सहमति जताई।
प्रधान ने कहा, “गठबंधन मजबूत है, सीटें ताकत के आधार पर बंटेंगी।”
ललन सिंह ने नीतीश कुमार को “बड़े भाई” का दर्जा देने पर जोर दिया।
अमित शाह की भूमिका
शाह ने निर्देश दिया कि बूथ-लेवल पर एनडीए की एकजुटता सुनिश्चित हो। प्रत्येक पंचायत नेता 50 घरों तक पहुंचेगा और गठबंधन की उपलब्धियों (जैसे जाति सर्वे, महिला आरक्षण) पर चर्चा करेगा।
जीतन राम मांझी का बयान
मांझी ने कहा,
“सीट बंटवारा जुलाई-अगस्त में तय होना था, लेकिन अब चुनाव तारीखों के बाद फाइनल होगा। हमारी पार्टी सभी 243 सीटों पर तैयार है, लेकिन विवाद नहीं।”
उन्होंने छोटे दलों को 43 सीटें (लोकसभा अनुपात से) देने का संकेत भी दिया।
चुनाव आयोग की 6 अक्टूबर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आचार संहिता लागू होते ही उम्मीदवारों की घोषणा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, एनडीए का टारगेट 225 सीटें है।
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संभावित सीट शेयरिंग फॉर्मूला
एनडीए के आंतरिक सर्वे और 2020 के चुनाव परिणाम (बीजेपी – 74, जेडीयू – 43) के आधार पर सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय है।
जेडीयू को “बड़े भाई” का दर्जा मिलने से हल्की बढ़त मिलने की संभावना है।
| पार्टी | अनुमानित सीटें | टिप्पणी |
|---|---|---|
| बीजेपी | 100–102 | सर्वे आधारित सीटें, 2020 में 110 लड़ीं, 74 जीतीं |
| जेडीयू (नीतीश कुमार) | 102–103 | बड़े भाई, सीएम फेस, 2020 में 115 लड़ीं, 43 जीतीं |
| एलजेपी (आरवी) – चिराग पासवान | 25–28 | 2024 में 5/5 सीटें जीतीं, “विन सुनिश्चित” सीटों की मांग |
| एचएएम (एस) – जीतन राम मांझी | 6–7 | दलित वोट बैंक पर निर्भर |
| आरएलएम – उपेंद्र कुशवाहा | 4–5 | कोइरी-यादव बहुल क्षेत्रों पर दावा |
| अन्य छोटे सहयोगी | 1–2 | शेष सीटें |
यह फॉर्मूला जून 2025 में तैयार हुआ था, लेकिन चिराग पासवान की मांगों के चलते जुलाई में देरी हुई।
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने 30 की बजाय 22–25 सीटें एलजेपी को देने पर सहमति दी।
मुख्य मुद्दे और चुनौतियां
1. चिराग पासवान का दबाव:
एलजेपी ने 40 सीटों की मांग की थी, लेकिन 25–28 पर सहमति बनी। पासवान ने शर्त रखी कि उन्हें सिर्फ “विन सुनिश्चित सीटें” दी जाएं, जहां 2020 में उन्होंने जेडीयू को नुकसान पहुंचाया था।
2. जेडीयू बनाम बीजेपी रणनीति:
जेडीयू 50:50 फॉर्मूला चाहती है, जबकि बीजेपी सर्वे-आधारित बंटवारे पर अड़ी है।
नीतीश कुमार की सेहत चिंता का विषय है, लेकिन वे अब भी सीएम फेस रहेंगे।
3. छोटे दलों की महत्वाकांक्षा:
मांझी और कुशवाहा ने “सम्मानजनक हिस्सा” मांगा है। एचएएम ने सभी 243 सीटों पर तैयारी का दावा किया, जिससे गठबंधन में तनाव बढ़ सकता है।
4. विपक्ष का हमला:
आरजेडी ने कहा, “एनडीए में फूट है, वोट चोरी का डर है।”
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है, जो एनडीए के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- नीतीश कुमार: “एनडीए एकजुट है, विकास और महिला सशक्तिकरण पर फोकस रहेगा।”
- सम्राट चौधरी (बीजेपी डिप्टी सीएम): “सर्वे से मजबूत उम्मीदवार चुनेंगे, 200+ सीटें जीतेंगे।”
- चिराग पासवान: “सम्मानजनक हिस्सा मिलेगा, नीतीश जी का साथ देंगे।”
- तेजस्वी यादव (आरजेडी): “एनडीए का फॉर्मूला विफल होगा, युवा बेरोजगारी पर वोट देंगे।”
निष्कर्ष
एनडीए की रणनीति अब बूथ-लेवल मजबूती और 2.75 करोड़ प्रवासी बिहारियों को जोड़ने पर केंद्रित है।
अगर सीट शेयरिंग फॉर्मूला जल्द फाइनल नहीं हुआ, तो उम्मीदवार चयन में देरी संभव है।
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