बीजेपी का ‘420 चार्ज’ हमला — विस्तृत रिपोर्ट
पटना/दिल्ली, 13 अक्टूबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हलचल के बीच दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आईआरसीटीसी होटल घोटाले में गंभीर आरोप तय किए हैं। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) और आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
पहली सुनवाई 27 अक्टूबर से रोजाना होगी। यह फैसला लालू परिवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह चुनावी माहौल में उनकी राजनीतिक छवि पर असर डाल सकता है।
आरजेडी ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताया, जबकि बीजेपी ने इसे “420 का चार्ज” फ्रेम होने पर आरजेडी के “भ्रष्टाचार मॉडल” का सबूत बताया।
घोटाले की पृष्ठभूमि
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।
सीबीआई के अनुसार, लालू ने आईआरसीटीसी के रांची (पावन इंटरनेशनल) और पुरी (कोणार्क लॉज) होटलों के रखरखाव के ठेके सुझाता होटल प्राइवेट लिमिटेड (विजय और विनय कोचर) को अनुचित तरीके से दिए।
बदले में, पटना में तीन एकड़ जमीन बेनामी कंपनियों के जरिये लालू परिवार को हस्तांतरित की गई। इसे “लैंड फॉर कॉन्ट्रैक्ट स्कैम” कहा गया है — जो “लैंड फॉर जॉब्स” मामले से मिलता-जुलता है।
मुख्य आरोप और धाराएं
| आरोपी का नाम | प्रमुख धाराएं | आरोप का सारांश |
|---|---|---|
| लालू प्रसाद यादव | IPC 420, 120B; PC Act 13(2) r/w 13(1)(d) | रेल मंत्री रहते ठेके देने में साजिश, परिवार को जमीन का लाभ |
| राबड़ी देवी | IPC 420, 120B; PC Act 13(2) r/w 13(1)(d) | बेनामी कंपनी के माध्यम से जमीन प्राप्ति में साजिश |
| तेजस्वी यादव | IPC 420, 120B; PC Act 13(2) r/w 13(1)(d) | कंपनी शेयर और जमीन लेन-देन में हिस्सेदारी |
| अन्य 11 आरोपी | IPC 120B, 420; PC Act संबंधित | ठेके आवंटन और लैंड डील में सहयोग |
स्रोत: कोर्ट ऑर्डर और सीबीआई चार्जशीट (13 अक्टूबर 2025)
कोर्ट की कार्यवाही और ट्रायल शेड्यूल
- 13 अक्टूबर: स्पेशल जज विशाल गोग्ने की अदालत में लालू व्हीलचेयर पर पेश हुए।
राबड़ी और तेजस्वी भी मौजूद थे। सभी ने आरोपों से इनकार किया। - जज का बयान: “सबूत साजिश और लाभ को इंगित करते हैं।”
- 27 अक्टूबर से रोजाना सुनवाई होगी।
लालू की व्यक्तिगत पेशी अनिवार्य नहीं; वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा रहेगी।
समयरेखा:
- 7 जुलाई 2017 – सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की
- 1 मार्च 2025 – सीबीआई ने बहस पूरी की
- 29 मई 2025 – फैसला सुरक्षित रखा गया
- 13 अक्टूबर 2025 – आरोप तय
- 27 अक्टूबर 2025 – ट्रायल शुरू
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
बीजेपी का हमला: “420 का चार्ज, आरजेडी का चेहरा बेनकाब”
रविशंकर प्रसाद (बीजेपी सांसद):
“तेजस्वी बिहार बदलने की बात करते हैं, लेकिन उन पर 420 का चार्ज है। चारा घोटाला से लेकर आईआरसीटीसी तक, आरजेडी का इतिहास भ्रष्टाचार का रहा है।”
संजू वर्मा (बीजेपी प्रवक्ता):
“कोर्ट ने लालू-राबड़ी-तेजस्वी को ट्रायल के लिए बुलाया है। यह परिवार बिहार के गरीबों को लूटता रहा।”
प्रतुल शाह देव (बीजेपी):
“पूर्व सीएम और सीएम कैंडिडेट पर 420 का चार्ज लगना दुर्लभ है — यही लालू मॉडल है।”
नीरज कुमार (बीजेपी):
“यह मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की जीत है।”
राजीव रंजन प्रसाद (जेडीयू):
“रोजगार की बात करने वाले अब भ्रष्टाचार के आरोपी हैं। जनता सब देख रही है।”
आरजेडी और विपक्ष का पलटवार
तेजस्वी यादव:
“यह राजनीतिक प्रतिशोध है। कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन बीजेपी के खिलाफ लड़ते रहेंगे। बिहार की जनता समझदार है, यह चुनावी ड्रामा जानती है।”
लालू प्रसाद यादव:
“रेल मंत्री रहते मैंने रेलवे को 90,000 करोड़ का लाभ पहुंचाया। आरोप झूठे हैं, ट्रायल का सामना करूंगा।”
कांग्रेस:
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा — “यह पूर्व-चुनाव साजिश है, ताकि विपक्ष को कमजोर किया जा सके।”
चुनावी असर और विश्लेषण
यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव (6–11 नवंबर) से ठीक पहले आया है।
एनडीए इसे भ्रष्टाचार-विरोधी मुद्दे के रूप में उठा रही है, जबकि आरजेडी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला तेजस्वी यादव की “युवा रोजगार” छवि को कमजोर कर सकता है।
प्रशांत किशोर (जन सुराज) ने भी इसे “आरजेडी की कमजोरी” बताया।
अगर ट्रायल में दोष सिद्ध हुआ, तो सजा हो सकती है — हालांकि अपील का रास्ता खुला रहेगा।
निष्कर्ष:
आईआरसीटीसी घोटाला केस ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है।
अब 27 अक्टूबर से शुरू होने वाला ट्रायल तय करेगा कि यह मामला एनडीए को लाभ देगा या आरजेडी के लिए सहानुभूति लाएगा।









