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मुजफ्फरपुर में गांजा तस्करी का बड़ा खुलासा: 1.25 करोड़ की खेप बरामद, 3 गिरफ्तार, नेटवर्क पर छापेमारी तेज

By Ayush

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मुजफ्फरपुर, 18 अक्टूबर 2025:
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में नशा तस्करी के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
कांटी थाना क्षेत्र के पखनाहा में एक कंटेनर से लगभग 1.25 करोड़ रुपये मूल्य का गांजा बरामद किया गया।
ऑपरेशन में तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन अन्य फरार हो गए।
उत्पाद विभाग और स्थानीय पुलिस अब अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए छापेमारी तेज कर रही है।


कैसे हुआ खुलासा: रातभर की नाकेबंदी और जब्ती

उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि कांटी इलाके में गांजा तस्करी का बड़ा रैकेट सक्रिय है।
17 अक्टूबर की रात टीम ने पखनाहा में नाकेबंदी की और एक संदिग्ध कंटेनर को रोका।

कंटेनर की तलाशी में बरामद:

  • लगभग 600-700 किलोग्राम गांजा (सटीक मात्रा जांच में)
  • प्लास्टिक पैकेट और कवर, जिनमें गांजा छिपाया गया था
  • 2 मोबाइल फोन, नकदी, फर्जी दस्तावेज बरामद
  • कंटेनर को स्कॉर्ट कर रही एक कार भी पकड़ी गई

जब टीम ने कार रोकी, तो उसमें सवार तीन तस्कर फरार हो गए। कंटेनर चालक समेत तीन लोगों को मौके पर गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि खेप ओडिशा के गंजाम जिले से लाई जा रही थी और इसे यूपी व हरियाणा के बाजारों में पहुंचाया जाना था।


गिरफ्तार तस्कर और उनकी पहचान

उत्पाद विभाग ने तीनों आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

गिरफ्तार आरोपी:

  • अमित कुमार (25 वर्ष, सहरसा): कंटेनर चालक, मुख्य आरोपी। दो साल से रैकेट से जुड़ा।
  • राजेश सिंह (32 वर्ष, हरियाणा): सहायक चालक, नेटवर्क का मध्यस्थ। फर्जी आधार कार्ड बरामद।
  • विकास यादव (28 वर्ष, मुजफ्फरपुर): स्थानीय संपर्क, खेप वितरण का जिम्मेदार।

फरार आरोपी:

  • दिनेश कुमार (हरियाणा): स्कॉर्ट कार चालक।
  • राहुल (हरियाणा): नेटवर्क का मुख्य लिंक।
  • अमरजीत पाल (बिहार): स्थानीय सप्लायर।

सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आसपास के जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।

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नेटवर्क का खुलासा: ओडिशा से हरियाणा तक फैला तस्करी तंत्र

जांच में पता चला कि गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है और बिहार को नशे का हब बना रहा है।

Modus Operandi (तरीका):

  1. स्रोत: ओडिशा के आदिवासी इलाकों से सस्ता गांजा खरीदा जाता।
  2. परिवहन: कंटेनरों में सब्जी या नमक की बोरियों के बीच छिपाकर भेजा जाता।
  3. वितरण: मुजफ्फरपुर से ट्रेन और कारों के जरिए यूपी, दिल्ली और हरियाणा तक सप्लाई।
  4. कनेक्शन: नेपाल बॉर्डर से भी लिंक — जहां से हेरोइन और अन्य ड्रग्स मंगवाए जाते हैं।

अधिकारी का बयान:

“यह बिहार में नशा तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक है,”
— उत्पाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।

उन्होंने बताया कि विभाग अब हरियाणा और ओडिशा पुलिस के साथ समन्वय कर रहा है ताकि पूरे नेटवर्क को पकड़ा जा सके।


प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई

  • कानूनी कदम: तीनों आरोपियों को 18 अक्टूबर को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने 14 दिन की रिमांड दी है।
  • छापेमारी: मुजफ्फरपुर, वैशाली और पूर्वी चंपारण में संयुक्त टीम की छापेमारी जारी।
  • अलर्ट: पड़ोसी राज्यों को सूचना भेजी गई है।
  • जनजागरूकता: एसएसपी मनोज कुमार ने कहा —
    “नागरिक नशा तस्करी की सूचना गुप्त रूप से दें। हमारा लक्ष्य नशामुक्त बिहार है।”

सरकार के ‘नशा मुक्ति अभियान’ के तहत इस अभियान को और तेज किया गया है।


प्रभाव और निष्कर्ष

इस बरामदगी से स्थानीय बाजार में नशे की कीमतें बढ़ने की संभावना है,
लेकिन साथ ही तस्करों में दहशत फैल गई है।

2025 में बिहार में नशे की दर्जनों बड़ी खेपों की बरामदगी हो चुकी है,
जो यह दर्शाता है कि राज्य में नशे का अवैध व्यापार कितना गहरा हो चुका है।

निष्कर्ष:
मुजफ्फरपुर की यह कार्रवाई बिहार में नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि नशामुक्त समाज के लिए सहयोग करें।

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