पटना, 6 अक्टूबर 2025: बिहार की राजधानी पटना ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुबह 11 बजे ISBT (पटना जंक्शन) से भूतनाथ स्टेशन तक 3.6 किलोमीटर लंबे पहले चरण का उद्घाटन किया।
इससे पटना भारत का 19वां मेट्रो शहर बन गया है। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अधिकारी मौजूद थे।
इस मौके पर मिथिला पेंटिंग्स से सजी मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई।
परियोजना का अवलोकन
पहला चरण (कॉरिडोर-1):
ISBT से भूतनाथ तक 3.6 किमी का हिस्सा, जिसमें तीन स्टेशन — पटना जंक्शन, राजेंद्र नगर, और भूतनाथ शामिल हैं। यह कॉरिडोर शहर के घनी आबादी वाले पूर्व-पश्चिम इलाकों को जोड़ता है।
कुल परियोजना:
पटना मेट्रो के दो कॉरिडोर (कुल 31 किमी) हैं —
- कॉरिडोर-1: दानापुर से भूतनाथ (15 किमी)
- कॉरिडोर-2: पटना जंक्शन से पाटलिपुत्र बस टर्मिनल (16 किमी)
पूरी परियोजना 2027 तक पूरी होगी। कुल लागत ₹13,365 करोड़ है।
DMRC की भूमिका:
निर्माण और तकनीकी सहायता दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने दी है। मेट्रो में ड्राइवरलेस तकनीक और CBTC सिस्टम (Communication-Based Train Control) का उपयोग किया गया है।
मेट्रो की विशेषताएं

डिज़ाइन:
कोच और स्टेशनों पर मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग्स का प्रयोग, जो बिहार की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। प्रत्येक स्टेशन पर स्थानीय कला और इतिहास से जुड़ी थीम रखी गई है।
सुविधाएं:
- वातानुकूलित कोच और फ्री वाई-फाई
- सीसीटीवी और ऑटोमेटिक टिकट मशीन
- दिव्यांगजनों के लिए रैंप और लिफ्ट
- सौर पैनल और रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
पर्यावरणीय प्रभाव:
मेट्रो से रोज़ाना 2 लाख वाहनों की कमी और 20% तक कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
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किराया और परिचालन
किराया:
- न्यूनतम ₹15, अधिकतम ₹30 (पहले चरण के लिए)
- डिजिटल पेमेंट और स्मार्ट कार्ड सुविधा
- पहले सप्ताह में 50% छूट की घोषणा
समय:
- सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक परिचालन
- हर 5–7 मिनट में एक ट्रेन
- प्रत्येक ट्रेन में 3 कोच, कुल क्षमता 300 यात्री
- पहले चरण में 50,000 दैनिक यात्रियों का लक्ष्य
- परियोजना पूरी होने पर 10 लाख दैनिक यात्री का अनुमान
उद्घाटन समारोह और राजनीतिक संदर्भ
सीएम नीतीश कुमार का बयान:
“यह बिहार के विकास की नई शुरुआत है। पटना अब दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों की श्रेणी में शामिल हो गया है। मेट्रो से रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।”
उन्होंने केंद्र सरकार और DMRC का आभार जताया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
- RJD नेता तेजस्वी यादव ने उद्घाटन की टाइमिंग पर सवाल उठाया: “चुनाव से पहले मेट्रो और ₹10,000 की किश्त, यह जनता को लुभाने की चाल है। 20 साल में सिर्फ 3.6 किमी?”
- कांग्रेस ने इसे “चुनावी स्टंट” बताया।
सोशल मीडिया चर्चा:
#PatnaMetro ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स ने मेट्रो को “बिहार की शान” बताया, जबकि कुछ ने देरी और सीमित दायरे की आलोचना की।
एक यूजर ने लिखा — “3.6 किमी में क्या क्रांति? पूरे कॉरिडोर का इंतज़ार कब तक?”
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
- रोजगार: निर्माण के दौरान 10,000 प्रत्यक्ष और 50,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां; परिचालन से 2,000 स्थायी रोजगार।
- शहरी यातायात: ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में कमी; ISBT और भूतनाथ जैसे इलाकों में समय की बचत।
- पर्यटन: मिथिला थीम और सांस्कृतिक प्रदर्शन पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
चुनौतियां और भविष्य
- देरी: परियोजना 2019 में शुरू हुई थी, लेकिन कोविड और भूमि अधिग्रहण की समस्याओं के कारण 2025 तक खिंच गई। विपक्ष ने इसे “20 साल की सुस्ती” कहा।
- विस्तार योजना:
- 2026 तक पटना जंक्शन से दानापुर सेक्शन तैयार होगा।
- 2027 तक दोनों कॉरिडोर पूरे होंगे।
- सुरक्षा: पहले दिन भारी भीड़ की आशंका; 500 पुलिसकर्मी तैनात। मेटल डिटेक्टर और बैग स्कैनर लगाए गए।
जनता की प्रतिक्रिया
उद्घाटन के बाद पहले ही दिन हजारों लोगों ने मेट्रो की सवारी की।
एक यात्री रवि कुमार (छात्र, पटना यूनिवर्सिटी) ने कहा —
“राजेंद्र नगर से भूतनाथ तक अब सिर्फ 15 मिनट में पहुंच गया, पहले 45 मिनट लगते थे।”
कुछ यात्रियों ने किराए को “थोड़ा महंगा” बताया। X (ट्विटर) पर #PatnaMetro के तहत मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
निष्कर्ष:
पटना मेट्रो बिहार के शहरी विकास और आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अगले चरणों से जुड़ी जानकारी के लिए DMRC और बिहार सरकार की वेबसाइट पर अपडेट्स देखें।
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