21 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने मंगलवार को पटना के शेखपुरा हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए।उन्होंने दावा किया कि BJP ने उनकी पार्टी के कम से कम तीन घोषित उम्मीदवारों को धमकाकर, फुसलाकर और केंद्रीय नेताओं से मिलवाकर नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया।पीके ने इसे “लोकतंत्र की सरेआम हत्या” बताया और कहा कि BJP को जन सुराज के ईमानदार उम्मीदवारों से सबसे ज्यादा डर है, क्योंकि “जन सुराज वोटकटवा नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की ताकत है।”
तीन सीटों पर हस्तक्षेप का आरोप
प्रशांत किशोर ने तीन खास मामलों का उल्लेख किया और फोटो व वीडियो सबूत दिखाए।
1. दानापुर विधानसभा सीट (पटना जिला)
- जन सुराज उम्मीदवार मुटुर शाह (या अखिलेश सिंह) नामांकन दाखिल नहीं कर सके।
- पीके ने आरोप लगाया कि BJP नेताओं ने उन्हें “हाईजैक” कर लिया।
- उन्होंने अमित शाह के साथ मुटुर शाह की फोटो दिखाते हुए कहा कि दबाव डालकर नामांकन रोका गया।
- पीके ने यह भी कहा कि महागठबंधन के एक “बाहुबली” नेता (रित लाल यादव) के दबाव में यह सब हुआ।
2. ब्रह्मपुर विधानसभा सीट (बक्सर जिला)
- उम्मीदवार डॉ. सत्यप्रकाश तिवारी ने तीन दिन प्रचार के बाद अचानक नामांकन वापस ले लिया।
- पीके ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उन्हें अमित शाह से मिलवाकर नामांकन न करने के लिए मजबूर किया।
- उन्होंने कहा कि BJP ने यहां LJP के “बाहुबली” हुलास पांडेय को फायदा पहुंचाने के लिए हस्तक्षेप किया।
3. गोपालगंज विधानसभा सीट
- उम्मीदवार डॉ. शशि शेखर सिन्हा, जो रघुनाथ पांडेय के दामाद हैं, ने भी अचानक नाम वापस ले लिया।
- पीके का आरोप: BJP नेताओं ने सिन्हा के परिवार पर दबाव डाला और उन्हें जन सुराज से हटने को कहा।
- उन्होंने इसे “उम्मीदवारों की खरीद-फरोख्त” बताया।
पीके का बयान
“पिछले पांच दिनों में तीन उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया गया। BJP की छवि है कि चाहे चुनाव कोई भी जीते, सरकार वही बनाती है। लेकिन जन सुराज के उम्मीदवार बिकने वाले नहीं हैं।”
उन्होंने गुजरात के सूरत लोकसभा चुनाव 2024 का उदाहरण देते हुए कहा कि BJP वहां भी विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन से रोक चुकी है।
BJP का पलटवार
BJP ने सभी आरोपों को झूठा और राजनीतिक नौटंकी बताया।
प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा:
“प्रशांत किशोर खुद भागने वाले हैं। उनके उम्मीदवारों का नामांकन रद्द होना उनकी अपनी कमजोरी है।”
उन्होंने X (ट्विटर) पर लिखा कि जन सुराज ‘वोटकटवा’ पार्टी है, और ये आरोप सिर्फ महागठबंधन को बचाने का प्रयास हैं।
BJP प्रवक्ताओं ने कहा कि अगर सबूत हैं, तो चुनाव आयोग में शिकायत करें, मीडिया में ड्रामा न करें।
राजनीतिक विश्लेषण
विशेषज्ञों का मानना है कि ये विवाद बिहार चुनाव के माहौल को और ध्रुवीकृत करेगा।
एक पूर्व IAS अधिकारी ने कहा,
“अगर पीके के आरोपों में सच्चाई मिली, तो विपक्ष को बड़ा फायदा हो सकता है।”
हालांकि, BJP समर्थक इसे “प्रचार स्टंट” बता रहे हैं।
जन सुराज की स्थिति
- जन सुराज ने बिहार की 243 में से 240 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
- तीन उम्मीदवारों के नामांकन वापस लिए जाने या रद्द होने के बाद भी, पार्टी सभी सीटों पर मुकाबला करने का दावा कर रही है।
- पीके ने कहा,
“चाहे जितने उम्मीदवार खरीद लो, जनता का फैसला नहीं बदलेगा। 14 नवंबर को बिहार में इतिहास लिखा जाएगा।”
निष्कर्ष
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बिहार चुनावी माहौल में नया मोड़ लेकर आई है।
पीके और BJP के बीच यह “विश्वास बनाम भय” की लड़ाई कही जा रही है, जो आने वाले दिनों में और तीखी हो सकती है।
जन सुराज अब इस मामले को चुनाव आयोग तक ले जाने की तैयारी में है।














