पटना/बेतिया, 21 नवंबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी की भारी हार के बाद प्रशांत किशोर (पीके) ने भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का मौन उपवास रखा। यह उपवास 20 नवंबर सुबह 11 बजे शुरू हुआ और 21 नवंबर सुबह 11:15 बजे समाप्त हुआ। उन्होंने इसे “आत्ममंथन और प्रायश्चित” का प्रतीक बताया और चुनावी हार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। उपवास तोड़ते समय स्थानीय स्कूल की बच्चियों ने उन्हें जूस पिलाया।
पीके ने मीडिया से बातचीत में एनडीए सरकार पर वोट खरीदने, मंत्रिमंडल में भ्रष्ट तत्वों को शामिल करने और चुनावी धांधली के गंभीर आरोप लगाए। साथ ही, उन्होंने 2026 से शुरू होने वाले “बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान” की घोषणा की।
उपवास की पृष्ठभूमि
शुरुआत:
18 नवंबर को पटना प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पीके भितिहरवा पहुंचे—वहीं से उनकी जन सुराज यात्रा शुरू हुई थी। उन्होंने कहा:
“हमसे गलती हुई होगी, पर गुनाह नहीं किया। जाति-धर्म की राजनीति नहीं की। हार की 100% जिम्मेदारी मेरी है।”
20 नवंबर को उन्होंने मौन व्रत रखा। ठंड के बावजूद 50 से अधिक समर्थक पूरी रात मौजूद रहे।
समापन:
21 नवंबर सुबह बच्चियों ने उन्हें जूस पिलाकर मौन व्रत समाप्त कराया। पीके भावुक हुए और बोले:
“बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा… आज धक्का है, पर भविष्य में जीत हमारी होगी।”
चुनावी हार पर प्रशांत किशोर की प्रतिक्रिया
जन सुराज ने 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीती। पार्टी को 2–3% वोट मिले और अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई।
पीके के मुख्य बिंदु:
- जंगलराज का डर:
“मतदाताओं ने सोचा कि अगर जन सुराज नहीं जीता, तो आरजेडी आ जाएगी। यह डर अंतिम चरणों में हावी हो गया।” - भीड़ बनाम वोट:
“पदयात्रा में भीड़ थी, लेकिन वोटों में नहीं बदली।” - आत्मस्वीकार:
“शायद मेरी कुछ गलतियां थीं, पर संघर्ष दोगुना होगा।”
Also Read पटना में ट्रिपल मर्डर: विस्तृत अपडेट (25 नवंबर 2025)
एनडीए पर आरोप: वोट खरीद और धांधली
उपवास समाप्ति के बाद पीके के आरोप:
1. वोट खरीद योजना
- “महिलाओं को 10-10 हजार देकर वोट खरीदा गया।”
- जीविका दीदियों को इस ‘प्रबंधन’ में लगाया गया।
- “अगर योजना थी, तो 6 महीने में हर महिला को 2 लाख दें, वरना यह वोट खरीद है।”
2. कैबिनेट पर तंज
- “नीतीश ईमानदार हैं, पर उनकी सरकार भ्रष्ट तत्वों को मंत्रिमंडल में ला रही है।”
3. चुनावी धांधली
- “कुछ अदृश्य शक्तियां सक्रिय थीं।
अज्ञात पार्टियों को लाखों वोट मिले—यह सामान्य नहीं।” - ईवीएम पर संदेह जताया, पर कहा कि “सबूत बाद में आएंगे।”
2026 अभियान: बिहार नवनिर्माण संकल्प
पीके ने चुनावी हार को नई शुरुआत बताया और बड़े कार्यक्रम का ऐलान किया:
- 15 जनवरी 2026 से अभियान शुरू
- बिहार के 1,18,000 वार्डों में व्यक्तिगत दौरा
- महिलाओं के 2 लाख रुपये वाली योजना पर विशेष फोकस
- शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और उद्योगों पर चर्चा
- “5 साल तक पैसों की कमी नहीं होगी—हम मजबूत विपक्ष रहेंगे।”
व्यक्तिगत वचन:
- 20 साल की संपत्ति (दिल्ली फ्लैट सहित) पार्टी को दान
- अगले 5 साल की आय का 90% आंदोलन में
- लोगों से मिलने के लिए 1,000 रुपये की शुल्क नीति
- “जो नहीं देगा, उससे नहीं मिलूंगा।”
राजनीतिक प्रभाव
- समर्थक:
उपवास स्थल पर भीड़ और सोशल मीडिया ट्रेंड ने उत्साह दिखाया। - विपक्ष:
एनडीए ने आरोपों को “हार का रोना” कहा।
आरजेडी ने कहा: “पीके की रणनीति विफल रही।” - विश्लेषक:
मानते हैं कि यह अभियान 2029 के चुनावों की तैयारी है।
पीके ने कहा:
“अगर वादा पूरा नहीं किया, तो राजनीति छोड़ दूंगा।”
समापन
यह घटना बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय खोल सकती है—जहाँ पीके हार के बाद भी बड़े पैमाने पर जनसंपर्क और पुनर्निर्माण अभियान का रास्ता चुन रहे हैं।









