बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) को करारी हार का सामना करना पड़ा। 2020 में 75 सीटें जीतने वाली पार्टी इस बार महज 25 सीटों पर सिमट गई। चुनावी शिकस्त के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह तेज हो गया है। खासकर तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 14 विधायक तेजस्वी के संपर्क में नहीं हैं और वे नई पार्टी बनाने की योजना बना रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो आरजेडी के पास विपक्ष के नेता (लोपा) का पद बचाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि इसके लिए न्यूनतम 25 विधायक जरूरी हैं। आइए, इस मुद्दे की गहराई से पड़ताल करें।
पृष्ठभूमि: चुनावी हार और परिवार में दरार
चुनाव परिणाम का असर:
15 नवंबर 2025 को घोषित नतीजों में एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर बहुमत पा लिया, जबकि महागठबंधन को महज 40 सीटें मिलीं। आरजेडी 143 सीटों पर लड़ी और सिर्फ 25 जीत सकी। तेजस्वी यादव ने अपनी सीट रघोपुर तो जीत ली, लेकिन पार्टी की हार ने उनके नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया।
परिवारिक विवाद:
16 नवंबर को लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट में राजनीति छोड़ने और परिवार से अलग होने की घोषणा कर दी। उन्होंने तेजस्वी के दो करीबी सलाहकारों—संजय यादव और रमीज—पर चुनावी हार और परिवार में दरार का जिम्मेदार बताया।
तेज प्रताप यादव ने अपनी बहन का समर्थन करते हुए “जयचंदों” पर निशाना साधा।
14 विधायकों का असंतोष: क्या है सच्चाई?
सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के अनुसार, आरजेडी के 25 में से 14 विधायक तेजस्वी से नाराज हैं और नई पार्टी या समूह बनाने पर विचार कर रहे हैं।
- आरजेडी ने आरोपों को खारिज किया है।
- विधायकों के नाम सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
- रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह गुट MY वोट बैंक वाले क्षेत्रों से आता है और रोहिणी–तेज प्रताप के निकट माना जाता है।
एक्स पर मीम्स की बाढ़ आ गई—
“14 विधायक निकल गए तो आरजेडी 11 सीटों पर रह जाएगी!”
लेकिन कोई आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं है।
तेजस्वी की प्रतिक्रिया: पद छोड़ने की पेशकश, लालू का समर्थन
17 नवंबर को तेजस्वी ने विधायकों की बैठक में कहा:
“अगर आप चाहें, कोई और नेता चुन लें। हार की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं।”
- लालू यादव ने हस्तक्षेप कर कहा कि नेतृत्व तेजस्वी ही करेंगे।
- इसके बाद सभी 25 विधायकों ने उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना।
- तेजस्वी विपक्ष के नेता बने रहे।
संभावित प्रभाव: फूट से विपक्ष कमजोर
- लोपा का संकट: नेता प्रतिपक्ष के लिए 25 विधायकों की आवश्यकता।
यदि 14 विधायक अलग हुए, तो यह पद स्वतः चला जाएगा। - नई पार्टी की संभावना:
यदि बनी, तो यह MY वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है, लेकिन लालू परिवार की विभाजन रेखा और चौड़ी होगी। - कुल मिलाकर विपक्ष कमजोर होगा।
Also Read बिहार में साक्षरता दर में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- बीजेपी: “रोहिणी का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है।”
- जेडीयू: विपक्ष में अराजकता।
- एसपी और जन सुराज: आरजेडी विवाद पर चुप्पी।
विश्लेषकों का कहना है कि आरजेडी मुस्लिम–यादव वोट से आगे बढ़ने में विफल रही, परिवारिक विवाद ने स्थिति और खराब की।
निष्कर्ष: संकट में आरजेडी, पर लालू की पकड़ मजबूत
21 नवंबर 2025 तक किसी बड़े विभाजन की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। तेजस्वी को फिलहाल समर्थन है।
लेकिन रोहिणी और तेज प्रताप की नाराजगी unresolved है और 14 विधायकों की खबरें पार्टी पर दबाव बढ़ा रही हैं।
यदि ये अफवाहें सच साबित हुईं, तो बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर संभव है और 2029 चुनावों में विपक्ष की भूमिका कमजोर पड़ सकती है।









