बिहार की राजनीति में खरमास (मकर संक्रांति से पहले का अशुभ माना जाने वाला समय) समाप्त होते ही हलचल तेज हो गई है। 15–16 जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट की आशंका जताई जा रही है। पार्टी के 4 विधायकों में से 3 विधायक—रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह—नाराज बताए जा रहे हैं और JDU (जनता दल यूनाइटेड) या BJP की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।
RLM में नाराजगी की मुख्य वजह
नवंबर 2025 में बनी नीतीश कुमार सरकार में उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश (जो विधायक नहीं हैं) को पंचायती राज मंत्री बनाया। इस फैसले को पार्टी के अन्य विधायकों ने परिवारवाद और अन्याय के रूप में देखा।
- पार्टी की चौथी विधायक स्नेहलता देवी (उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी) हैं।
- बाकी तीन विधायक इस निर्णय से गहरी असंतुष्टि में बताए जा रहे हैं।
JDU की ओर से ऑफर और संपर्क
- JDU नेता भगवान सिंह कुशवाहा ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिए हैं कि खरमास खत्म होने के बाद यदि ये विधायक JDU में आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।
- उनका बयान: “वे मेरे पुराने परिचित हैं, बातचीत होती रहती है। जदयू में आने पर सम्मान मिलेगा, किसी का तिरस्कार नहीं होता।”
- कई रिपोर्ट्स में दावा है कि ये विधायक JDU के संपर्क में हैं और मकर संक्रांति के बाद बड़े राजनीतिक बदलाव संभव हैं।
BJP से भी संपर्क की चर्चा
- कुछ सूत्रों के अनुसार, इन विधायकों के BJP नेताओं से भी संपर्क की खबरें हैं।
- हाल ही में BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की चर्चा सामने आई थी।
- हालांकि, JDU में शामिल होने की अटकलें ज्यादा मजबूत मानी जा रही हैं, क्योंकि कुशवाहा समाज में JDU की पकड़ मजबूत है।
राजनीतिक असर क्या होगा?
यदि तीनों विधायक JDU में शामिल होते हैं, तो इसके बड़े राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं:
- RLM का टूटना तय, उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक स्थिति कमजोर होगी।
- उपेंद्र कुशवाहा का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म हो रहा है; पार्टी कमजोर होने पर दोबारा राज्यसभा पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
- दीपक प्रकाश को मंत्री बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर MLC बनना जरूरी है, लेकिन पार्टी टूटने पर यह रास्ता कठिन हो जाएगा।
- यह पूरा घटनाक्रम NDA के भीतर JDU बनाम BJP की प्रतिस्पर्धा को भी उजागर करता है।
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पार्टी का आधिकारिक पक्ष
- उपेंद्र कुशवाहा और RLM के प्रवक्ताओं ने टूट की खबरों से इनकार किया है।
- विधायक माधव आनंद का कहना है कि नाराजगी जरूर है, लेकिन पार्टी टूटने वाली नहीं है।
- इसके बावजूद, खरमास खत्म होते ही पटना के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चरम पर हैं।
निष्कर्ष
यह पूरा मामला बिहार की राजनीति में खरमास के बाद आने वाले संभावित राजनीतिक झटकों की ओर इशारा करता है। खबरें लाइव हिंदुस्तान, आज तक, इंडियन एक्सप्रेस, NDTV जैसी विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार जरूरी है।
अगर आप इस मुद्दे पर लेटेस्ट अपडेट, विधायकों की अगली चाल, या NDA के अंदर की रणनीति पर अलग से विश्लेषण चाहते हैं, तो बताएं।









