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उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट के संकेत मजबूत: 3 विधायकों की बगावत, JDU/BJP में जाने की चर्चा तेज

By Ayush

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पटना, 17 जनवरी 2026 – बिहार की सियासत में एनडीए के छोटे सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में गहरा संकट मचा हुआ है। पार्टी के संस्थापक और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को पंचायती राज मंत्री बनाए जाने के फैसले से पार्टी के चार विधायकों में से तीन (रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह) खुले तौर पर नाराज हैं। यह असंतोष अब बगावत में बदल चुका है, और खरमास/मकर संक्रांति (जनवरी 2026) के बाद बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना तेज हो गई है।

मुख्य कारण: ‘परिवारवाद’ का आरोप

  • नवंबर 2025 में नीतीश कुमार सरकार बनने के बाद RLM कोटा से दीपक प्रकाश (जो न विधायक हैं, न एमएलसी) को मंत्री बनाया गया।
  • पार्टी के चार विधायकों में से एक स्नेहलता देवी (उपेंद्र की पत्नी, सासाराम से विधायक) हैं, लेकिन बाकी तीन विधायकों को यह फैसला ‘परिवारवाद’ और अन्याय के रूप में लगा।
  • विधायकों का कहना है कि चुनाव जीतकर आए उनके योगदान को नजरअंदाज कर परिवार को तरजीह दी गई, जबकि वे खुद मंत्री बनने की उम्मीद कर रहे थे।
  • रामेश्वर महतो (बाजपट्टी) ने सोशल मीडिया पर लिखा था: “नेतृत्व की नीयत धुंधली होने पर जनता ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं रह सकती।”

टूट के संकेत और संपर्क

  • तीनों विधायक कई बार पार्टी के कार्यक्रमों से दूर रहे, जैसे दिसंबर 2025 में उपेंद्र द्वारा आयोजित लिट्टी-चोखा पार्टी में शामिल नहीं हुए।
  • उसी दिन वे बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले, जिससे अटकलें तेज हुईं।
  • मकर संक्रांति के दौरान नितिन नवीन के चूड़ा-दही भोज में रामेश्वर महतो और आलोक सिंह दिखे, जबकि उपेंद्र कुशवाहा भी मौजूद थे — लेकिन तीनों विधायकों की अलग तस्वीरें वायरल हुईं।
  • JDU नेता भगवान सिंह कुशवाहा ने खुलकर कहा: “खरमास के बाद अगर ये तीन विधायक बागी होकर आते हैं, तो उनका स्वागत होगा। वे मेरे पुराने परिचित हैं, अक्सर बात होती है। JDU में सम्मान मिलेगा।”
  • सूत्रों के मुताबिक, तीनों विधायक बीजेपी के संपर्क में ज्यादा हैं, लेकिन JDU में शामिल होने की भी चर्चा है क्योंकि कुशवाहा समाज में JDU का मजबूत आधार है।

राजनीतिक प्रभाव

  • अगर तीन विधायक पार्टी छोड़ते हैं, तो RLM टूट जाएगी (केवल एक विधायक बचेगा — स्नेहलता देवी)।
  • यह उपेंद्र कुशवाहा के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म हो रहा है। टूटने पर दोबारा राज्यसभा में एंट्री मुश्किल।
  • बेटे दीपक प्रकाश को 6 महीने में एमएलसी बनना जरूरी है, वरना मंत्री पद छिन सकता है — टूटने पर JDU या BJP ऐसा करने को तैयार नहीं होंगे।
  • एनडीए में बीजेपी (89 विधायक) और JDU (85 विधायक) के बीच ‘नंबर वन’ की होड़ तेज है; यह टूट दोनों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

Also Read बिहार राजनीति: खरमास खत्म होते ही उपेंद्र कुशवाहा की RLM में टूट की अटकलें तेज

पार्टी का रुख और विधायकों की प्रतिक्रिया

  • उपेंद्र कुशवाहा और RLM प्रवक्ता ने टूट की खबरों को अफवाह बताया है। उपेंद्र ने कहा: “पार्टी पूरी तरह एकजुट है, ऐसे सवाल बेवजह हैं।”
  • माधव आनंद ने कहा: “RLM एकजुट है, अगर कोई नाराजगी है तो बैठकर चर्चा करेंगे।”
  • रामेश्वर महतो ने एक पोस्ट में तीनों विधायकों की फोटो शेयर कर लिखा: “हम एकजुट हैं” — लेकिन नाराजगी बरकरार है।

यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में ‘ऑपरेशन दलबदल’ का हिस्सा लगता है, जहां खरमास के बाद कई बदलाव संभव हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है — कांग्रेस के 6 विधायकों के JDU में जाने की भी चर्चा है। आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

(स्रोत: लाइव हिंदुस्तान, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, प्रभात खबर, आज तक – जनवरी 2026 तक की रिपोर्ट्स पर आधारित)

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